Hathras Professor: विवादों में घिरे प्रोफेसर ने लिया वीआरएस, कॉलेज ने एंट्री पर लगाया प्रतिबंध

Hathras Professor: विवादों में घिरे प्रोफेसर ने लिया वीआरएस, कॉलेज ने एंट्री पर लगाया प्रतिबंध

Hathras Professor Sexual Harassment Case: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में चर्चित रहे यौन शोषण प्रकरण से जुड़े प्रोफेसर रजनीश ने अंततः स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। जिस बागला डिग्री कॉलेज में वह वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे थे, वहां अब उनके प्रवेश पर भी पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन के इस फैसले को संस्थान की छवि और छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वीआरएस आवेदन को मिली मंजूरी

कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वैद्य गोपाल शरण गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रोफेसर रजनीश ने कुछ समय पूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। प्रबंधन समिति द्वारा इस आवेदन पर विचार करने के बाद शनिवार को इसे स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

Hathras Professor Takes VRS After Controversy

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि कॉलेज की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षक की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है और उस पर लगे गंभीर आरोपों का प्रभाव पूरे संस्थान पर पड़ता है।

कॉलेज में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध

प्रबंधन ने प्रोफेसर रजनीश के कॉलेज परिसर में प्रवेश पर भी सख्त रोक लगा दी है। अध्यक्ष के अनुसार, “प्रोफेसर के खिलाफ लगे आरोपों और उससे उत्पन्न परिस्थितियों के कारण कॉलेज की छवि को गहरा आघात पहुंचा है। ऐसे में यह जरूरी हो गया था कि संस्थान की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं।”

इस निर्णय के बाद अब प्रोफेसर का कॉलेज से हर प्रकार का संबंध समाप्त माना जा रहा है। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, हालांकि अधिकांश लोग इसे आवश्यक कदम मान रहे हैं।

गंभीर आरोपों ने मचाया था हड़कंप

प्रोफेसर रजनीश का नाम उस समय सुर्खियों में आया था, जब करीब 30 छात्राओं ने उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। आरोपों के अनुसार, उन्होंने छात्राओं का विश्वास जीतकर उनका शोषण किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाए।

जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन से लगभग 65 वीडियो बरामद होने की बात सामने आई थी। यह भी आरोप लगाए गए थे कि इन वीडियो को कथित तौर पर पोर्न वेबसाइट्स पर अपलोड किया गया। इस घटना ने न केवल कॉलेज बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।

अदालत से मिली राहत

हालांकि, मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब लगभग 18 दिन पहले एडीजे कोर्ट हाथरस ने प्रोफेसर रजनीश को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

अदालत के इस फैसले के बाद कानूनी रूप से प्रोफेसर को राहत जरूर मिल गई, लेकिन सामाजिक और संस्थागत स्तर पर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। यही कारण है कि कॉलेज प्रबंधन ने अपनी ओर से अलग निर्णय लेते हुए वीआरएस स्वीकार करने और प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों, विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए मजबूत आंतरिक तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली का होना अत्यंत आवश्यक है।

छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को लेकर आवाज उठाई थी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि अदालत के फैसले के बाद मामला कानूनी रूप से शांत हो गया, लेकिन नैतिक और सामाजिक बहस अब भी जारी है।

अनुशासन से कोई समझौता नहीं

कॉलेज प्रबंधन ने अपने फैसले के जरिए यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि संस्थान की गरिमा और छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप लगने पर, भले ही वह कानूनी रूप से दोषमुक्त क्यों न हो, संस्थान अपनी आंतरिक नीतियों के आधार पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *