सहरसा पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और चार्जशीट के आधार पर 19 साल पुराने आपराधिक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। सहरसा न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/जनजाति) सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, प्रथम, रंजूला भारती ने महिषी थाना कांड संख्या 10/07 (21 जनवरी 2007) में चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला महिषी थाना क्षेत्र के झाड़ा गांव से जुड़ा है। आरोपियों पर अवैध प्रवेश, मारपीट, चोरी, धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। दोषी ठहराए गए आरोपियों में बहादुर मुखिया, उमेश मुखिया, दिनेश मुखिया और अब्दुल कयुम शामिल हैं। ये सभी झाड़ा गांव, थाना महिषी, जिला सहरसा के निवासी हैं। कोर्ट ने चारों आरोपियों को भेजा जेल न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई। इसमें धारा 323 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास, धारा 341 के तहत एक माह का साधारण कारावास, धारा 379 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड शामिल है। इसके अतिरिक्त, धारा 447 के तहत तीन माह का साधारण कारावास और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(x) के अंतर्गत एक वर्ष का साधारण कारावास की सजा भी दी गई है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमरेन्द्र कुमार ने मामले की पैरवी की। उन्होंने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को सिद्ध किया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त थे। इस फैसले को सामाजिक न्याय और कानून के प्रति विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में सजा सुनाए जाने से पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है। सहरसा पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और चार्जशीट के आधार पर 19 साल पुराने आपराधिक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। सहरसा न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति/जनजाति) सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, प्रथम, रंजूला भारती ने महिषी थाना कांड संख्या 10/07 (21 जनवरी 2007) में चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला महिषी थाना क्षेत्र के झाड़ा गांव से जुड़ा है। आरोपियों पर अवैध प्रवेश, मारपीट, चोरी, धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। दोषी ठहराए गए आरोपियों में बहादुर मुखिया, उमेश मुखिया, दिनेश मुखिया और अब्दुल कयुम शामिल हैं। ये सभी झाड़ा गांव, थाना महिषी, जिला सहरसा के निवासी हैं। कोर्ट ने चारों आरोपियों को भेजा जेल न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई। इसमें धारा 323 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास, धारा 341 के तहत एक माह का साधारण कारावास, धारा 379 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड शामिल है। इसके अतिरिक्त, धारा 447 के तहत तीन माह का साधारण कारावास और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(x) के अंतर्गत एक वर्ष का साधारण कारावास की सजा भी दी गई है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमरेन्द्र कुमार ने मामले की पैरवी की। उन्होंने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को सिद्ध किया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त थे। इस फैसले को सामाजिक न्याय और कानून के प्रति विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में सजा सुनाए जाने से पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है।


