5 किमी के दायरे में नर्मदा में मिल रहे आधा दर्जन छोटे बड़े नाले

जीवन रेखा नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास सालों बीतने के बाद भी अधूरे हैं। शहरी क्षेत्र में 5 किलो मीटर के दायरे में आधा दर्जन छोटे, बड़े नाले नर्मदा के पवित्र जल में गंदगी डाल रहे हैं। सीवरेज सिस्टम नहीं होने के कारण 33 हजार घरों से निकला हजारों लीटर गंदा पानी भी सीधा नदी में मिल रहा है।

33 वार्डो में बसे शहर में मालाखेड़ी से भीलपुरा तक 5 किलो मीटर के दायरे में हर्बल पार्क के पास, विवेकनंद घाट,पर्यटन घाट, राजा मोहल्ला, मंगलवारा घाट, राजघाट, भीलपुरा क्षेत्र में छोटे, बड़े नालियों और नालों से 24 घंटे गंदा पानी नर्मदा जल में मिल रहा है। कोरी घाट पर तो नाला ओवर फ्लो होकर घाट की सीढिय़ों पर से बहते हुए नर्मदा में मिल रहा है। सेठानी घाट और मंगलवारा घाट के बीच में भी राजा मोहल्ला की नालियों का पानी सीधा आ रहा है। भीलपुरा क्षेत्र दशहरा मैदान का नाला पवित्र जल में मिलने के साथ रेतीले तट पर फैलने लगा है। सीवरेज परियोजना के लिए वर्ष 2018 में किए गए सर्वे के मुताबिक शहरी क्षेत्र के बस्तियों और झुग्गी बस्तियों से निकलने वाले निस्तार के पानी को प्रबंधन करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण 33 हजार घरों के गंदा पानी 24 घंटे नालियों के जरिए नर्मदा में मिल रहा है।

गंदगी के बीच लगाना पड़ रही डुबकी

पर्यटन घाट नाले से नर्मदा में मिलने वाली गंदगी सेठानी घाट के किनारों तक आ जाती है। मजबूरी में श्रद्धालु गंदगी के बीच ही डुबकी लगाते हैं। सुबह तो श्रद्धालुओं को पहले पानी में तैर रही गंदगी को साफ करना पड़़ता है। इसके बाद स्नान हो पाते हैं।

150 करोड़ की सीवरेज परियोजना अधूरी

150 करोड़ की नर्मदापुरम सीवरेज परियोजना के जरिए नालों के गंदा पानी को शोधन करने के लिए शहर में एक 24 एमएलडी के एसटीपी प्लांट, 4 पंप हाउस का निर्माण होना था। इसमें अभी तक दो पंप हाउस का निर्माण होना बाकी है। वार्डो में 100 किलोमीटर तक भूमिगत पाइप लाइन डालकर घरों से निकलने वाले पानी को फिल्टर प्लांट तक पहुंचा था लेकिन अभी तक 80 किलोमीटर क्षेत्र में ही लाइन डली है। 20 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप डलना बाकी है।

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