Ahmedabad. गुजरात के सूरत कट (डायमंड) को भौगोलिक संकेत (जीआइ टैग) प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। शहर स्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआइआइ) की पहल से सूरत के हीरा उद्योग को वैश्विक पहचान मिलने का मार्ग और मजबूत हुआ है। हाल ही में ईडीआइआइ परिसर में दो दिवसीय आइपी यात्रा कार्यक्रम के तहत आयोजित जीआइ क्षेत्रीय बैठक में भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के तहत कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स (डिजाइन एंड ट्रेड मार्क्स) डॉ. उन्नत पंडित ने यह प्रमाण पत्र प्रदान किया।
सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश खुंट एवं अन्य सदस्यों ने यह प्रमाण-पत्र स्वीकार किया। यह काफी बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि सूरत का हीरा (डायमंड) के वैश्विक उद्योग में अहम योगदान है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के 90 फीसदी पॉलिश्ड हीरे का उत्पादन सूरत में ही होता है। ऐसे में यह प्रमाण-पत्र सूरत की कट डायमंड की कारीगरी को आधिकारिक मान्यता है।
ईडीआइआइ ने अब तक गुजरात के पांच प्रमुख शिल्पों को जीआइ टैग दिलाने में सहयोग किया है, जबकि 15 अन्य उत्पादों की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, संस्थान द्वारा स्थापित जीआइ फैसिलिटेशन सेंटर कारीगरों को बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस दौरान डॉ. पंडित ने कहा, भारत अनेक क्षेत्रों में वर्षों की साधना और अभ्यास पर आधारित ज्ञान की समृद्ध धरोहर रखने वाला देश है। इसमें निहित विचारों और प्रक्रियाओं को सही समय पर प्रोत्साहित करना और संरक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जीआइ सुविधा हमारे उत्पादकों और कारीगरों के सामाजिक तथा आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक है। खुशी है कि हम उनके उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर पहचान मिल सके।
उत्पादों के संरक्षण को जीआइ टैग महत्वपूर्ण: शुक्ला
ईडीआइआइ के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा कि जीआइ टैग उत्पादों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं। इसके साथ पेटेंट दाखिल करना हमारे समृद्ध ज्ञान और परंपरा की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विचार से नवाचार और नवाचार से व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है, ताकि विचार आर्थिक और सामाजिक कल्याण पर प्रभाव डाल सकें।
इन पांच शिल्प, उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने में सफलता
ईडीआइआइ ने पांच शिल्पों, उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने में मदद प्रदान कर सफलता पाई है। इनमें गुजरात सूफ एम्ब्रॉयडरी, अहमदाबाद सोदागरी ब्लॉक प्रिंट, भरूच सुजनी वीविंग, सूरत सादेली क्राफ्ट के बाद अब सूरत कट (डायमंड) शामिल है। संस्थान ने एमएसएमई इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी फैसिलिटेशन सेंटर के अंतर्गत गुजरात के 15 शिल्पों और कृषि उत्पादों के लिए जीआइ टैगिंग प्रक्रिया प्रारंभ की है, जो वर्तमान में उन्नत चरणों में है।


