तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कॉलेजों में अतिथि शिक्षक धरना दे रहे हैं। इनका कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी के कारण शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 703 सृजित पदों के सापेक्ष वर्तमान में मात्र 399 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि 304 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। शिक्षकों की इस कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। इस बीच, बिहार सरकार की ओर से सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए लाई गई प्रस्तावित नियमावली ने विवाद को और गहरा दिया है। सरकार की नई अधिसूचना में किए गए बदलावों को लेकर अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में धरना दिया अपनी मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में एक दिवसीय जोरदार धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि नई नियमावली उनके हितों के खिलाफ है और इसमें तत्काल संशोधन की आवश्यकता है। यूजीसी रेगुलेशन के शर्तों को नजरअंदाज करने का आरोप संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने बताया कि लोक भवन की ओर से पारित बिहार सहायक प्राध्यापक अधिनियम ड्राफ्ट 2025 में यूजीसी रेगुलेशन 2018 की मूल शर्तों को नजरअंदाज किया गया है। पूर्व की व्यवस्था में शोध पत्रों और काम अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते थे, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मुख्य मांगों में डोमिसाइल नीति लागू करना, शोध और अनुभव के अंकों को बहाल करना और अधिकतम आयु सीमा को 45 साल से बढ़ाकर फिर से 55 साल करना शामिल है। शिक्षकों ने तर्क दिया कि नेट (NET) परीक्षा के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं होती, ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में उम्र का यह बंधन तर्कहीन है। इसके साथ ही, सालों से विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के समायोजन के लिए विशेष प्रावधान की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए मजबूर होंगे। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कॉलेजों में अतिथि शिक्षक धरना दे रहे हैं। इनका कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी के कारण शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 703 सृजित पदों के सापेक्ष वर्तमान में मात्र 399 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि 304 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। शिक्षकों की इस कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। इस बीच, बिहार सरकार की ओर से सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए लाई गई प्रस्तावित नियमावली ने विवाद को और गहरा दिया है। सरकार की नई अधिसूचना में किए गए बदलावों को लेकर अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में धरना दिया अपनी मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में एक दिवसीय जोरदार धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि नई नियमावली उनके हितों के खिलाफ है और इसमें तत्काल संशोधन की आवश्यकता है। यूजीसी रेगुलेशन के शर्तों को नजरअंदाज करने का आरोप संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने बताया कि लोक भवन की ओर से पारित बिहार सहायक प्राध्यापक अधिनियम ड्राफ्ट 2025 में यूजीसी रेगुलेशन 2018 की मूल शर्तों को नजरअंदाज किया गया है। पूर्व की व्यवस्था में शोध पत्रों और काम अनुभव के आधार पर अंक दिए जाते थे, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मुख्य मांगों में डोमिसाइल नीति लागू करना, शोध और अनुभव के अंकों को बहाल करना और अधिकतम आयु सीमा को 45 साल से बढ़ाकर फिर से 55 साल करना शामिल है। शिक्षकों ने तर्क दिया कि नेट (NET) परीक्षा के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं होती, ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में उम्र का यह बंधन तर्कहीन है। इसके साथ ही, सालों से विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के समायोजन के लिए विशेष प्रावधान की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए मजबूर होंगे।


