ग्रो फाउंडर केशरे बोले-रोज खुद को साबित करना ही सफलता:स्टार्टअप फेल होने के बाद बनाई ₹1 लाख करोड़ की कंपनी, जानें 9 सक्सेस मंत्र

ग्रो फाउंडर केशरे बोले-रोज खुद को साबित करना ही सफलता:स्टार्टअप फेल होने के बाद बनाई ₹1 लाख करोड़ की कंपनी, जानें 9 सक्सेस मंत्र

ललित केशरे (44 वर्ष) उन दिग्गज उद्यमियों में हैं, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण असर पैदा किया। मध्यप्रदेश के किसान परिवार में जन्मे ललित का सफर आईआईटी बॉम्बे, कॉरपोरेट नौकरी, एक असफल स्टार्टअप और फिर भारत के अग्रणी निवेश प्लेटफॉर्म ग्रो की स्थापना तक पहुंचता है। 9 वर्षों में ही ग्रो को 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के मार्केट कैप तक ले जाना उनकी दूरदृष्टि, धैर्य और कस्टमर-फोकस का प्रमाण है। वे मानते हैं कि सफलता हर दिन खुद को दोबारा साबित करने का नाम है। आइए, उन्हीं से जानें उनकी कहानी… आर्थिक चुनौतियां बढ़ी तो फ्लिपकार्ट में काम किया मेरे नाना जी कहते थे- दुनिया में अगर वैल्यू क्रिएट करो, तो असली खुशी मिलती है। उनकी यही सीख आज तक मोटिवेट करती है। जब 1999 में आईआईटी बॉम्बे में चयन हुआ, तब आईटी बूम का दौर था। चारों तरफ स्टार्टअप्स की चर्चा थी। मेरे मन में भी कुछ नया और बड़ा करने की चाह पैदा हुई। कॉलेज से निकलने के बाद आईटी कंपनी में 7 साल नौकरी की। फिर एक जुनूनी टीम के साथ एजुटेक स्टार्टअप एडुफिलिक्स शुरू किया। मकसद किफायती दामों पर अच्छी क्वालिटी का एजुकेशन कंटेंट देना था। हम स्केल नहीं कर पाए। यह असफलता मेरे लिए सबसे बड़ी सीख बन गई। समझ आया कि किसी आइडिया का सही समय होना कितना जरूरी है। उस दौर में इंटरनेट स्लो था, पहुंच कम थी और इकोसिस्टम तैयार नहीं था। यहीं से मैंने प्रोडक्ट-मार्केट फिट और कस्टमर की असली समस्या को समझने का महत्व सीखा। आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं तो फ्लिपकार्ट से जुड़ा। वहां बड़े स्केल पर बिजनेस चलाना सीखा। बेंगलुरु के एक कैफे में हम चार दोस्त हर रविवार मिलते थे। वहीं निवेश को सरल बनाने का विचार पक्का हुआ। देश में निवेश करने वालों की संख्या बहुत कम थी, जबकि समस्या बड़ी थी। सही समय आने पर हम को-फाउंडर्स ने अपनी-अपनी जॉब छोड़ी और ग्रो की शुरुआत की। परिवार और मेंटर्स का साथ मिला। ग्रो की सबसे बड़ी ताकत है- कस्टमर को सुनना। हम रोज फीडबैक पढ़ते हैं और उसी के आधार पर प्रोडक्ट बनाते हैं। म्यूचुअल फंड, ट्रेडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट- हर फीचर जमीन से निकली जरूरत का नतीजा है। पुरानी सफलताएं मायने नहीं रखतीं। हर रोज, हर नया प्रोडक्ट नई लड़ाई है, उसे जीतना ही असली सफलता है।’ 10 हजार करोड़ की संपत्ति वाले ललित की जिंदगी के 9 बड़े सबक

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