अप्रैल से शुरू हो सकता है स्वच्छ सर्वेक्षण का जमीनी निरीक्षण, अधूरी तैयारी से नगर पालिका के अंक कटने का खतरा

अप्रैल से शुरू हो सकता है स्वच्छ सर्वेक्षण का जमीनी निरीक्षण, अधूरी तैयारी से नगर पालिका के अंक कटने का खतरा

12,500 अंकों की परीक्षा में 10,500 अंक ऑन-ग्राउंड असेसमेंट के, मैदानी हकीकत पर टिकी रैंकिंग।

बैतूल। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर अप्रैल माह से जमीनी स्तर पर निरीक्षण शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस बार सर्वेक्षण में कुल अंक 12,500 रखे गए हैं, जिसमें से 10,500 अंक ऑन-ग्राउंड असेसमेंट (नागरिक फीडबैक सहित) के लिए निर्धारित हैं, जबकि 2,000 अंक सर्टिफिकेशन के लिए तय किए गए हैं। ऐसे में साफ है कि इस बार शहर की वास्तविक जमीनी स्थिति ही रैंकिंग का भविष्य तय करेगी।
सर्टिफिकेशन के 2,000 अंकों में 1,000 अंक ओडीएफ, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ डबल प्लस और वाटर प्लस श्रेणी के लिए निर्धारित हैं, जबकि 1,000 अंक गार्बेज फ्री सिटी के लिए रखे गए हैं। यानी कागजी दावों से ज्यादा अब धरातल पर व्यवस्थाओं की मजबूती को परखा जाएगा।
इन बिंदुओं पर होगी बारीक जांच
सर्वेक्षण के दौरान सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, पार्कों की साफ-सफाई, सडक़ों की स्वच्छता, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, फव्वारों की कार्यशीलता, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था, वार्ड स्तर पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कचरे के पृथक्कीकरण की व्यवस्था का सूक्ष्म अवलोकन किया जाएगा। इसके साथ ही नागरिकों से सीधे फीडबैक भी लिया जाएगा, जो कुल अंकों में अहम भूमिका निभाएगा।
तैयारी अधूरी, बढ़ सकती है मुश्किल
हालांकि शहर में मौजूदा हालात पर नजर डालें तो कई स्थानों पर नगर पालिका की तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। कई वार्डों में नालियां गंदगी से भरी हैं, कुछ सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और सौंदर्यीकरण के कार्य भी अधूरे दिखाई देते हैं। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था भी नियमित और प्रभावी नहीं मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो ऑन-ग्राउंड असेसमेंट में अंक कटना तय है। चूंकि 10,500 अंक सीधे मैदानी निरीक्षण और नागरिक फीडबैक से जुड़े हैं, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी रैंकिंग पर भारी पड़ सकती है।
क्या दोहराई जाएगी पिछली स्थिति?
पिछले वर्षों में भी सर्वेक्षण के दौरान नगर पालिका को कई कमियों के कारण अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया था। इस बार भी यदि ठोस तैयारी नहीं की गई तो परिणाम निराशाजनक हो सकते हैं। शहरवासियों का कहना है कि सर्वेक्षण से पहले ही नहीं, बल्कि सालभर सफाई व्यवस्था सुदृढ़ रहनी चाहिए, तभी स्थायी सुधार संभव है।अब देखना यह है कि अप्रैल से संभावित निरीक्षण से पहले नगर पालिका कितनी सक्रियता दिखाती है। फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में बेहतर रैंकिंग पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इनका कहना

  • स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर हमनें तैयारियां शुरू कर दी है। इस बार शासन से 5 स्टार रैंकि ंग का टारगेट निर्धारित है। इसलिए ट्रेंचिंग ग्राउंड पर वैज्ञानिक पद्धति से कचरे के निष्पादन के लिए टेंडर लगाए गए हैं। रात्रिकालीन सफाई की जा रही है। फव्वारों, पार्क, चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण आदि पर ध्यान दिया जा रहा है।
    -सतीश मटसेनिया, सीएमओ नगरपालिका बैतूल।

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