नालंदा में 19वां ‘ह्वेनसांग स्मृति दिवस’ पर भव्य कार्यक्रम:चीन के महावाणिज्यदूत मुख्य अतिथि के तौर पर होंगे शामिल; बौद्ध भिक्षु और शोधार्थी भी पहुंचेंगे

नालंदा में 19वां ‘ह्वेनसांग स्मृति दिवस’ पर भव्य कार्यक्रम:चीन के महावाणिज्यदूत मुख्य अतिथि के तौर पर होंगे शामिल; बौद्ध भिक्षु और शोधार्थी भी पहुंचेंगे

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नालंदा के ऐतिहासिक खंडहरों के पास स्थित सांस्कृतिक ग्राम में आज(12 फरवरी 2026) 19वां ‘ह्वेनसांग स्मृति दिवस’ पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस वार्षिक आयोजन में इस बार चीन के महावाणिज्यदूत (कौंसल जनरल) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारत-चीन मैत्री का प्रतीक नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। कुलपति ने कहा कि यह स्मारक परिसर केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत और चीन के बीच सदियों पुराने बौद्धिक और सांस्कृतिक संवाद का जीवंत प्रतीक है। 7वीं शताब्दी के महान चीनी यात्री और विद्वान ह्वेनसांग की स्मृति में निर्मित यह परिसर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई की संयुक्त परिकल्पना का सुखद परिणाम है। यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रमाण है। पवित्र अवशेषों का संरक्षण कुलपति ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि शीघ्र ही इस परिसर में चीन सरकार की ओर से प्रदान किए गए ह्वेनसांग के पवित्र अवशेषों को भी संरक्षित किया जाएगा। यह कदम इस स्थल को और अधिक पवित्र और महत्वपूर्ण बना देगा। आधुनिक सुविधाओं का विकास वर्तमान में परिसर में कई आधुनिक सुविधाओं का विकास कार्य जोरों पर है। यहां अत्याधुनिक सम्मेलन कक्ष, ऑडियो-विजुअल शोध केंद्र और एक भव्य स्मृति सभागार का निर्माण किया जा रहा है। ये सुविधाएं शोधार्थियों और विद्वानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी हर वर्ष 12 फरवरी को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश से बौद्ध भिक्षु, विद्वान और शोधार्थी बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। यह आयोजन नालंदा की प्राचीन शैक्षणिक और बौद्धिक परंपरा को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक अध्ययन किया था और अपने यात्रा वृत्तांत में इस विश्वविद्यालय की महानता का विस्तृत वर्णन किया है, जो आज भी शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नालंदा के ऐतिहासिक खंडहरों के पास स्थित सांस्कृतिक ग्राम में आज(12 फरवरी 2026) 19वां ‘ह्वेनसांग स्मृति दिवस’ पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस वार्षिक आयोजन में इस बार चीन के महावाणिज्यदूत (कौंसल जनरल) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारत-चीन मैत्री का प्रतीक नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। कुलपति ने कहा कि यह स्मारक परिसर केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत और चीन के बीच सदियों पुराने बौद्धिक और सांस्कृतिक संवाद का जीवंत प्रतीक है। 7वीं शताब्दी के महान चीनी यात्री और विद्वान ह्वेनसांग की स्मृति में निर्मित यह परिसर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई की संयुक्त परिकल्पना का सुखद परिणाम है। यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रमाण है। पवित्र अवशेषों का संरक्षण कुलपति ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि शीघ्र ही इस परिसर में चीन सरकार की ओर से प्रदान किए गए ह्वेनसांग के पवित्र अवशेषों को भी संरक्षित किया जाएगा। यह कदम इस स्थल को और अधिक पवित्र और महत्वपूर्ण बना देगा। आधुनिक सुविधाओं का विकास वर्तमान में परिसर में कई आधुनिक सुविधाओं का विकास कार्य जोरों पर है। यहां अत्याधुनिक सम्मेलन कक्ष, ऑडियो-विजुअल शोध केंद्र और एक भव्य स्मृति सभागार का निर्माण किया जा रहा है। ये सुविधाएं शोधार्थियों और विद्वानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी हर वर्ष 12 फरवरी को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश से बौद्ध भिक्षु, विद्वान और शोधार्थी बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। यह आयोजन नालंदा की प्राचीन शैक्षणिक और बौद्धिक परंपरा को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक अध्ययन किया था और अपने यात्रा वृत्तांत में इस विश्वविद्यालय की महानता का विस्तृत वर्णन किया है, जो आज भी शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।  

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