रंगीलो फागुनोत्सव पर 26 को मुजफ्फरपुर क्लब से निकलेगी भव्य निशान यात्रा

सिटी रिपोर्टर|मुजफ्फरपुर रंगीलो फगुनोत्सव 2026 की शुरुआत बुधवार को प्रभातफेरी सह श्री श्याम गुणगान यात्रा से होगी। श्री श्याम मंदिर से सुबह गुणगान यात्रा से निकलकर मुख्य मार्गों से होते हुए गाजे-बाजे के साथ सिकंदरपुर स्थित श्री राणी सती दादी धाम एवं श्री ढ़ांढण सती मां अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचेगी। जहां श्रद्धालु भजन कीर्तन के साथ देवी-देवताओं का गुणगान करेंगे। इसके बाद 19 फरवरी को प्रभातफेरी श्री बंगलामुखी माता मंदिर पहुंचेगी। 20 फरवरी को श्री संतोषी माता मंदिर, 21 को श्री सत्यनारायण मंदिर, 22 को श्री राज-राजेश्वरी देवी मंदिर, 23 को श्री बाबा गरीबनाथ मंदिर एवं श्री दुर्गा स्थान, 24 को श्री बालाजी हनुमान मंदिर, अखाड़ाघाट, 25 को श्री सालासर हनुमान जी मंदिर सुतापट्टी गुणगान यात्रा पहुंचेगी। निशान यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और विजय का प्रतीक निशान यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और विजय का प्रतीक है। निशान का अर्थ ध्वज या पताका होता है, जो किसी देवता या शक्ति की उपस्थिति और संरक्षण का संकेत देता है। विशेष रूप से खाटू श्याम जी की भक्ति परंपरा में निशान यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार खाटू श्याम जी, बरबरिक का ही रूप हैं, जो महाभारत काल के महान योद्धा थे। बरबरिक युद्ध में सदैव कमजोर पक्ष का साथ देने का व्रत लिया था। जब श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति और संकल्प को देखा, तो धर्म की रक्षा हेतु उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बरबरिक ने प्रसन्नतापूर्वक अपना शीश अर्पित कर दिया। भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इसी श्रद्धा के कारण भक्तजन उनके मंदिर में निशान अर्पित करते हैं। सिटी रिपोर्टर|मुजफ्फरपुर रंगीलो फगुनोत्सव 2026 की शुरुआत बुधवार को प्रभातफेरी सह श्री श्याम गुणगान यात्रा से होगी। श्री श्याम मंदिर से सुबह गुणगान यात्रा से निकलकर मुख्य मार्गों से होते हुए गाजे-बाजे के साथ सिकंदरपुर स्थित श्री राणी सती दादी धाम एवं श्री ढ़ांढण सती मां अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचेगी। जहां श्रद्धालु भजन कीर्तन के साथ देवी-देवताओं का गुणगान करेंगे। इसके बाद 19 फरवरी को प्रभातफेरी श्री बंगलामुखी माता मंदिर पहुंचेगी। 20 फरवरी को श्री संतोषी माता मंदिर, 21 को श्री सत्यनारायण मंदिर, 22 को श्री राज-राजेश्वरी देवी मंदिर, 23 को श्री बाबा गरीबनाथ मंदिर एवं श्री दुर्गा स्थान, 24 को श्री बालाजी हनुमान मंदिर, अखाड़ाघाट, 25 को श्री सालासर हनुमान जी मंदिर सुतापट्टी गुणगान यात्रा पहुंचेगी। निशान यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और विजय का प्रतीक निशान यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, समर्पण और विजय का प्रतीक है। निशान का अर्थ ध्वज या पताका होता है, जो किसी देवता या शक्ति की उपस्थिति और संरक्षण का संकेत देता है। विशेष रूप से खाटू श्याम जी की भक्ति परंपरा में निशान यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार खाटू श्याम जी, बरबरिक का ही रूप हैं, जो महाभारत काल के महान योद्धा थे। बरबरिक युद्ध में सदैव कमजोर पक्ष का साथ देने का व्रत लिया था। जब श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति और संकल्प को देखा, तो धर्म की रक्षा हेतु उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बरबरिक ने प्रसन्नतापूर्वक अपना शीश अर्पित कर दिया। भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इसी श्रद्धा के कारण भक्तजन उनके मंदिर में निशान अर्पित करते हैं।  

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