बोधगया मैराथन का कालचक्र मैदान से भव्य शुभारंभ:15 देशों के 1500 धावकों ने लिया हिस्सा, खेल मंत्री ने दिया अवार्ड

बोधगया मैराथन का कालचक्र मैदान से भव्य शुभारंभ:15 देशों के 1500 धावकों ने लिया हिस्सा, खेल मंत्री ने दिया अवार्ड

शांति, करुणा और साधना की धरती कही जाने वाली बोधगया की धरती आज खेल और स्वास्थ्य का वैश्विक मंच बन गई है। कालचक्र मैदान से बोधगया मैराथन का भव्य शुभारंभ हुआ है। देश ही नहीं, दुनिया के 15 देशों से आए करीब 1500 धावकों ने एक साथ दौड़ लगाई। मैदान में जोश, उत्साह और अंतरराष्ट्रीय रंग साफ झलक दिखा है। दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने पुरस्कृत किया। मंत्री ने कहा कि मैराथन हेल्थ के दृष्टिकोण बेहतर प्रतियोगिता है। इससे आदमी खुद में फिट रहता है। जिस प्रकार से प्रदेश सरकार खेल के प्रति सकारात्मक कदम उठा रही है और आधारभूत संरचना मुहैया करा रही है। इससे साफ होता है कि आने वाले दिनों में खासकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने वाले भारतीय दल में बिहार के खिलाड़ी सबसे अधिक होंगे। इस मौके खेल मंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से खेल व खिलाड़ियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी गिनती गिनाई। इससे पहले खेल मंत्री महाबोधि मंदिर पहुंची और भगवान बुद्ध को नमन किया। साथ ही उन्होंने ध्यान साधना भी की। विजिटर बुक में उन्होंने सुखद अनुभूति का जिक्र किया। विधिवत झंडी दिखाकर रवाना किया मैराथन को विधिवत झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अलग-अलग आयु और क्षमता के धावकों के लिए 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की श्रेणियां तय की गई थीं। लंबी दूरी के पेशेवर धावक हों या फिटनेस के लिए दौड़ने वाले युवा, हर वर्ग की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। मैराथन से पहले प्रतिभागियों और आयोजकों ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। भगवान बुद्ध से शांति, स्वास्थ्य और सफल आयोजन की कामना की गई। इसके बाद धावक जब सड़कों पर उतरे, तो मानो बोधगया की गलियों में ऊर्जा दौड़ने लगी। विदेशी धावकों के साथ स्थानीय युवाओं की मौजूदगी ने आयोजन को वैश्विक और स्थानीय का सुंदर संगम बना दिया। आयोजकों के अनुसार बोधगया मैराथन का मकसद सिर्फ दौड़ नहीं है। उद्देश्य है लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और बोधगया को अंतरराष्ट्रीय खेल एवं पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाना। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से विदेशी पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रही मैराथन के दौरान सुरक्षा, चिकित्सा और यातायात की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रही। मेडिकल टीम लगातार सतर्क रही, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्वयंसेवकों ने जगह-जगह धावकों को पानी और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। दौड़ में शामिल विदेशी धावकों ने बोधगया की व्यवस्था और माहौल की सराहना की। कई प्रतिभागियों ने कहा कि महाबोधि मंदिर की शांति और आसपास का वातावरण मैराथन को खास बनाता है। स्थानीय लोगों ने भी सड़कों के किनारे खड़े होकर तालियों से धावकों का उत्साह बढ़ाया। कुल मिलाकर बोधगया मैराथन ने यह संदेश दिया कि बुद्ध की धरती अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खेल और अंतरराष्ट्रीय संवाद का मजबूत मंच भी बन रही है। शांति, करुणा और साधना की धरती कही जाने वाली बोधगया की धरती आज खेल और स्वास्थ्य का वैश्विक मंच बन गई है। कालचक्र मैदान से बोधगया मैराथन का भव्य शुभारंभ हुआ है। देश ही नहीं, दुनिया के 15 देशों से आए करीब 1500 धावकों ने एक साथ दौड़ लगाई। मैदान में जोश, उत्साह और अंतरराष्ट्रीय रंग साफ झलक दिखा है। दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने पुरस्कृत किया। मंत्री ने कहा कि मैराथन हेल्थ के दृष्टिकोण बेहतर प्रतियोगिता है। इससे आदमी खुद में फिट रहता है। जिस प्रकार से प्रदेश सरकार खेल के प्रति सकारात्मक कदम उठा रही है और आधारभूत संरचना मुहैया करा रही है। इससे साफ होता है कि आने वाले दिनों में खासकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने वाले भारतीय दल में बिहार के खिलाड़ी सबसे अधिक होंगे। इस मौके खेल मंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से खेल व खिलाड़ियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी गिनती गिनाई। इससे पहले खेल मंत्री महाबोधि मंदिर पहुंची और भगवान बुद्ध को नमन किया। साथ ही उन्होंने ध्यान साधना भी की। विजिटर बुक में उन्होंने सुखद अनुभूति का जिक्र किया। विधिवत झंडी दिखाकर रवाना किया मैराथन को विधिवत झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अलग-अलग आयु और क्षमता के धावकों के लिए 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की श्रेणियां तय की गई थीं। लंबी दूरी के पेशेवर धावक हों या फिटनेस के लिए दौड़ने वाले युवा, हर वर्ग की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। मैराथन से पहले प्रतिभागियों और आयोजकों ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। भगवान बुद्ध से शांति, स्वास्थ्य और सफल आयोजन की कामना की गई। इसके बाद धावक जब सड़कों पर उतरे, तो मानो बोधगया की गलियों में ऊर्जा दौड़ने लगी। विदेशी धावकों के साथ स्थानीय युवाओं की मौजूदगी ने आयोजन को वैश्विक और स्थानीय का सुंदर संगम बना दिया। आयोजकों के अनुसार बोधगया मैराथन का मकसद सिर्फ दौड़ नहीं है। उद्देश्य है लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और बोधगया को अंतरराष्ट्रीय खेल एवं पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाना। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से विदेशी पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रही मैराथन के दौरान सुरक्षा, चिकित्सा और यातायात की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रही। मेडिकल टीम लगातार सतर्क रही, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्वयंसेवकों ने जगह-जगह धावकों को पानी और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। दौड़ में शामिल विदेशी धावकों ने बोधगया की व्यवस्था और माहौल की सराहना की। कई प्रतिभागियों ने कहा कि महाबोधि मंदिर की शांति और आसपास का वातावरण मैराथन को खास बनाता है। स्थानीय लोगों ने भी सड़कों के किनारे खड़े होकर तालियों से धावकों का उत्साह बढ़ाया। कुल मिलाकर बोधगया मैराथन ने यह संदेश दिया कि बुद्ध की धरती अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खेल और अंतरराष्ट्रीय संवाद का मजबूत मंच भी बन रही है।  

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