गोंडा में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित राष्ट्रकथा महोत्सव इन दिनों पूर्वांचल की राजनीति का नया केंद्र बनता नजर आ रहा है। इस आयोजन में पूर्वांचल के कई चर्चित बाहुबली नेता एक मंच पर जुटे, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल का कोई वरिष्ठ सदस्य और केंद्र सरकार का कोई मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ, जिसे राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक मंच पर जुटे पूर्वांचल के बड़े बाहुबली चेहरे राष्ट्रकथा महोत्सव में जिन प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उनमें पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, मिर्जापुर से एमएलसी विनीत सिंह और एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह शामिल रहे। इन सभी नेताओं का गोंडा में एक साथ मंच साझा करना पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। छठे और सातवें दिन बढ़ी सियासी गर्माहट महोत्सव के छठे दिन सैयदराजा विधायक सुशील सिंह सुबह करीब 11 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का आशीर्वाद लिया। कुछ ही देर बाद पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी पहुंचे। इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटों-विधायक प्रतीक भूषण सिंह और सांसद करण भूषण सिंह ने धनंजय सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मंच पर सुशील सिंह और धनंजय सिंह एक साथ बैठे नजर आए और घंटों तक कथा सुनी। सातवें दिन पूर्वांचल के बाहुबली बृजेश सिंह भी महोत्सव में पहुंचे। बृजभूषण शरण सिंह के बेटों ने उनके भी पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद बृजेश सिंह और बृजभूषण शरण सिंह के बीच काफी समय बाद मुलाकात हुई और दोनों ने साथ बैठकर चाय पीते हुए लंबी बातचीत की। ‘38 साल पुराने रिश्ते हैं’-बृजेश सिंह मीडिया से बातचीत में बृजेश सिंह ने कहा, “बृजभूषण भैया से हमारे संबंध 1988 से हैं, यानी लगभग 38 साल पुराने। कुछ समय के लिए अलग-अलग प्रवास के कारण मुलाकात नहीं हो पाई थी। आज यहां आना उनका प्रेम और आशीर्वाद है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं कि पूर्वांचल के बाहुबली एक बार फिर एकजुट हो रहे हैं। महोत्सव के चौथे दिन मिर्जापुर से एमएलसी विनीत सिंह कार्यक्रम में पहुंचे थे और उन्होंने भी बृजभूषण शरण सिंह का आशीर्वाद लिया। वहीं बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह भी पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। सीएम योगी और मंत्रिमंडल की दूरी बनी चर्चा का विषय राष्ट्रकथा महोत्सव को लेकर बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और योगी मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों से मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया था। मंत्रियों ने आने का आश्वासन भी दिया, लेकिन कार्यक्रम में केवल मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, सूर्य प्रताप शाही और ए.के. शर्मा ही पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अधिकांश मंत्री कार्यक्रम से दूर रहे, जिसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। केंद्र सरकार से भी नहीं पहुंचा कोई बड़ा चेहरा पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन और राष्ट्रकथा महोत्सव में केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों और सांसदों को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि केंद्र सरकार से कोई मंत्री या बड़ा नेता कार्यक्रम में नहीं पहुंचा। बृजभूषण शरण सिंह के पुराने सहयोगी डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ही कार्यक्रम में मौजूद रहे। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित किसी भी बड़े नेता ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से बधाई नहीं दी। इसे लेकर दिनभर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा, खासकर तब जब बृजभूषण शरण सिंह को गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों और उनके बयानों को लेकर पार्टी नेतृत्व द्वारा उनका मनोबल कमजोर करने की रणनीति अपनाई जा रही है। यही कारण माना जा रहा है कि न तो बड़े नेता कार्यक्रम में पहुंचे और न ही जन्मदिन की सार्वजनिक बधाई दी गई। बड़े नेताओं की गैरहाजिरी के बावजूद दिखा शक्ति प्रदर्शन बड़े नेताओं की अनुपस्थिति के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपना शक्ति प्रदर्शन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 1 से 8 जनवरी तक प्रतिदिन एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ कथा में उमड़ी। इनमें 50 हजार से अधिक बच्चे शामिल रहे। 8 जनवरी को जन्मदिन के अवसर पर वे 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकले और लाखों समर्थकों के बीच जन्मदिन मनाया। करीब पांच लाख लोगों को भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया। बाहुबलियों की जुटान पर बृजभूषण बोले- बाहुबलियों के एकत्र होने को लेकर उठ रही चर्चाओं पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा,“जाकी रही भावना जैसी, हरि मूरत देखी तिन तैसी। जिसकी जैसी सोच है, वह वैसा अर्थ निकालेगा। बाहुबली आए तो उनकी चर्चा हुई, लेकिन साधारण लोगों की चर्चा नहीं हुई।


