महाबोधि महाविहार मंदिर में सोमवार की देर शाम तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने अपनी पत्नी और बेटी के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर पहुंचकर भगवान बुद्ध के चरणों में शीश नवाया। मंदिर परिसर में पहुंचने पर राज्यपाल और उनके परिवार का स्वागत किया गया। बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (बीटीएमसी) की सचिव डॉ. महास्वेता महारथी ने मुख्य भिक्षुओं और समिति के सदस्यों के साथ मिलकर उनका अभिनंदन किया। राज्यपाल को पारंपरिक ‘खादा’ भेंट किया गया। इस अवसर पर मुख्य भिक्षु भिक्खु चालिंदा, भिक्खु डॉ. दीनानंद, भिक्खु डॉ. मनोज और बीटीएमसी सदस्य डॉ. अरविंद सिंह भी मौजूद रहे। भिक्षु संघ के साथ राज्यपाल आरएन रवि और उनके परिवार ने गर्भगृह में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की। राज्यपाल ने ध्यान साधना भी की। इसके बाद वे उस पवित्र बोधि वृक्ष के पास पहुंचे, जिसके नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वहां भिक्षुओं ने मंत्रोच्चार कर राज्यपाल और उनके परिवार के लिए मंगलकामनाएं कीं। विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त किए
दर्शन और साधना के बाद राज्यपाल ने विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त किए। उन्होंने लिखा कि इस पवित्र स्थल पर आना उनके लिए गहरा आध्यात्मिक सौभाग्य है। यहां शांति, करुणा और बोध का जो संदेश मिला, वह मन को भीतर तक छू गया। महाबोधि मंदिर की दिव्य ऊर्जा प्रेरणादायक है और वे यहां से गहरी शांति और नई प्रेरणा लेकर लौट रहे हैं।
दौरे के समापन पर बीटीएमसी की ओर से राज्यपाल को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए। इनमें पवित्र बोधि पत्ता, प्रसिद्ध कलाकार उपेंद्र महारथी की बौद्ध विषयों पर आधारित कलाकृतियों का पोर्टफोलियो, महाबोधि महाविहार परिसर का चित्रात्मक दस्तावेज और पवित्र बोधि वृक्ष के संरक्षण पर आधारित पुस्तक शामिल रही। महाबोधि महाविहार मंदिर में सोमवार की देर शाम तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने अपनी पत्नी और बेटी के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर पहुंचकर भगवान बुद्ध के चरणों में शीश नवाया। मंदिर परिसर में पहुंचने पर राज्यपाल और उनके परिवार का स्वागत किया गया। बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (बीटीएमसी) की सचिव डॉ. महास्वेता महारथी ने मुख्य भिक्षुओं और समिति के सदस्यों के साथ मिलकर उनका अभिनंदन किया। राज्यपाल को पारंपरिक ‘खादा’ भेंट किया गया। इस अवसर पर मुख्य भिक्षु भिक्खु चालिंदा, भिक्खु डॉ. दीनानंद, भिक्खु डॉ. मनोज और बीटीएमसी सदस्य डॉ. अरविंद सिंह भी मौजूद रहे। भिक्षु संघ के साथ राज्यपाल आरएन रवि और उनके परिवार ने गर्भगृह में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की। राज्यपाल ने ध्यान साधना भी की। इसके बाद वे उस पवित्र बोधि वृक्ष के पास पहुंचे, जिसके नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वहां भिक्षुओं ने मंत्रोच्चार कर राज्यपाल और उनके परिवार के लिए मंगलकामनाएं कीं। विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त किए
दर्शन और साधना के बाद राज्यपाल ने विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त किए। उन्होंने लिखा कि इस पवित्र स्थल पर आना उनके लिए गहरा आध्यात्मिक सौभाग्य है। यहां शांति, करुणा और बोध का जो संदेश मिला, वह मन को भीतर तक छू गया। महाबोधि मंदिर की दिव्य ऊर्जा प्रेरणादायक है और वे यहां से गहरी शांति और नई प्रेरणा लेकर लौट रहे हैं।
दौरे के समापन पर बीटीएमसी की ओर से राज्यपाल को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए। इनमें पवित्र बोधि पत्ता, प्रसिद्ध कलाकार उपेंद्र महारथी की बौद्ध विषयों पर आधारित कलाकृतियों का पोर्टफोलियो, महाबोधि महाविहार परिसर का चित्रात्मक दस्तावेज और पवित्र बोधि वृक्ष के संरक्षण पर आधारित पुस्तक शामिल रही।


