तंबाकू पर बढ़ा सरकारी टैक्स, ITC-Godfrey के निवेशकों के मिनटों में डूबे करोड़ों रुपये।

तंबाकू पर बढ़ा सरकारी टैक्स, ITC-Godfrey के निवेशकों के मिनटों में डूबे करोड़ों रुपये।
शेयर बाजार में बुधवार को आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई, जो पिछले लगभग छह वर्षों में सबसे बड़ी रही। इसका कारण सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए उच्च कर को बताया जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, फरवरी 1 से सिगरेट पर प्रति 1,000 स्टिक 2,050 रुपये से 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लागू होगा।
बता दें कि इस बढ़े हुए शुल्क के साथ ही राष्ट्रीय आपदा कर भी जारी रहेगा, जिससे विश्लेषकों का अनुमान है कि कुल टैक्स में 30% से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है। आईटीसी के शेयर में 10% तक गिरावट आई, जबकि गोदफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड के शेयर मुंबई में 17% नीचे बंद हुए। दोनों कंपनियों के ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य के मुकाबले 20 गुना अधिक रहे। आईटीसी क्लासिक और गोल्ड फ्लेक जैसी सिगरेट ब्रांड बेचती है, जबकि गोदफ्रे मार्लबोरो और फोर स्क्वायर जैसे ब्रांड का संचालन करती है।
गौरतलब है कि आईटीसी की कुल आय का 40% हिस्सा सिगरेट से आता है, इसलिए इस कर वृद्धि से कंपनी की बिक्री पर असर पड़ने की संभावना है। जेफ़रीज़ फाइनेंशियल ग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि अगर कीमतों में वृद्धि ग्राहकों पर डाली जाती है, तो कम से कम 15% तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
मौजूदा कर वृद्धि, वस्तु एवं सेवा कर 40% के साथ लागू होगी और इसका मकसद सितंबर में किए गए व्यापक टैक्स कटौती से हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह कदम तंबाकू उत्पादों की कीमत को उच्च बनाए रखने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने की दिशा में एक प्रभावी उपाय है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इससे तंबाकू उत्पादों की तस्करी या ग्रे मार्केट के बढ़ने का जोखिम नहीं है।
भारत में 2.53 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। सरकार ने हाल ही में स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा कर भी लागू किया है, और मार्च में IPL में इन उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई।
आईटीसी और गोदफ्रे फिलिप्स की ओर से अभी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कर वृद्धि से सिगरेट की कीमत में बढ़ोतरी होगी और इसका असर बाजार और उपभोक्ता दोनों पर दिखाई देगा।

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