झारखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को प्रतिवर्ष मिलने वाली विद्यालय विकास निधि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जारी नहीं की गई है। इस कारण प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालयों में दैनिक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य बाधित हो गए हैं। शिक्षकों को विद्यालय संचालन के लिए जरूरी सामग्री अपनी जेब से खरीदनी पड़ रही है और कई विद्यालयों में बुनियादी व्यवस्था चरमरा गई है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई और प्रशासन के लिए आवश्यक खल्ली, झाड़ू, शौचालय सफाई सामग्री, साबुन, उपस्थिति पंजी, कैश बुक, मध्यान्ह भोजन पंजी, लेजर बुक, मीटिंग बुक और अन्य 40–45 प्रकार के अनिवार्य रजिस्टर की खरीद विकास निधि से होती है। लेकिन निधि नहीं मिलने से यह सब सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सबसे खराब स्थिति उन विद्यालयों की है, जहां एकल शिक्षक या पारा शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। सीमित मानदेय में कार्यरत पारा शिक्षकों के लिए निजी खर्च के साथ विद्यालय संचालन का खर्च उठाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ऐसे विद्यालयों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। विकास निधि के अभाव में विद्यालयों का रंग-रोगन नहीं हो पा रहा है, भवन जर्जर दिखने लगे हैं। झारखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को प्रतिवर्ष मिलने वाली विद्यालय विकास निधि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जारी नहीं की गई है। इस कारण प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालयों में दैनिक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य बाधित हो गए हैं। शिक्षकों को विद्यालय संचालन के लिए जरूरी सामग्री अपनी जेब से खरीदनी पड़ रही है और कई विद्यालयों में बुनियादी व्यवस्था चरमरा गई है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई और प्रशासन के लिए आवश्यक खल्ली, झाड़ू, शौचालय सफाई सामग्री, साबुन, उपस्थिति पंजी, कैश बुक, मध्यान्ह भोजन पंजी, लेजर बुक, मीटिंग बुक और अन्य 40–45 प्रकार के अनिवार्य रजिस्टर की खरीद विकास निधि से होती है। लेकिन निधि नहीं मिलने से यह सब सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सबसे खराब स्थिति उन विद्यालयों की है, जहां एकल शिक्षक या पारा शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। सीमित मानदेय में कार्यरत पारा शिक्षकों के लिए निजी खर्च के साथ विद्यालय संचालन का खर्च उठाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ऐसे विद्यालयों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। विकास निधि के अभाव में विद्यालयों का रंग-रोगन नहीं हो पा रहा है, भवन जर्जर दिखने लगे हैं।


