सरकारी फरमान या मुसीबत: स्कूलों की मरम्मत के 17 करोड़ अटकने की नौबत

सरकारी फरमान या मुसीबत: स्कूलों की मरम्मत के 17 करोड़ अटकने की नौबत

भीलवाड़ा जिले में भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुए 856 सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए स्वीकृत 17.12 करोड़ रुपए के बजट पर अब सरकारी लालफीताशाही और सख्त शर्तों का ग्रहण लग गया है। वित्तीय वर्ष समाप्ति पर है, लेकिन धरातल पर न तो काम पूरे हुए हैं और जो काम चल रहे हैं, उनके भुगतान के लिए जिला प्रशासन ने ऐसी शर्तें थोप दी हैं जिससे विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के पसीने छूट रहे हैं।

जिला कलक्टर की ओर से जारी नए आदेशों के तहत अब बिल पास कराने के लिए चार सदस्यों की उपखण्ड स्तरीय कमेटी से निरीक्षण करवाना होगा और बिल पर विधायक समेत सात अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं। इतने कम समय में इन सभी के हस्ताक्षर जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

जमीनी हकीकत: तीन बार टेंडर, फिर भी नहीं आए संवेदक

आपदा प्रबंधन सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से 16 दिसम्बर 2025 को इन 856 विद्यालय भवनों के लिए 1712 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई थी। लेकिन काम की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक मात्र 110 कार्य ही पूरे हो पाए हैं। 308 काम अब भी अधूरे (प्रगति पर) हैं। सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि शेष 438 कार्यों के लिए विभाग ने तीन बार टेंडर निकाले, लेकिन कोई भी संवेदक काम करने को तैयार नहीं हुआ।

कलक्टर का अल्टीमेटम: वरना अपनी जेब से भरो पैसा

जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने संबंधित विभागों को स्मरण पत्र-03 जारी कर अल्टीमेटम दिया है। आदेश में साफ लिखा है कि पूर्व में दो बार 11 और 24 फरवरी को निर्देश देने के बावजूद बिल प्राप्त नहीं हुए हैं। अब आगामी 3 दिवस में कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के साथ बिल पेश करने होंगे। सबसे बड़ा पेंच यह फंसा दिया गया है कि यदि इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट खर्च नहीं हुआ और अगले साल देनदारियां गईं, तो उसका भुगतान कार्यकारी संस्था विभाग को अपने स्वयं के बजट मद से करना होगा।

प्रक्रिया में उलझे ठेकेदार और अफसर

एक तरफ 31 मार्च की डेडलाइन और ‘खुद के बजट से भुगतान’ की चेतावनी है, तो दूसरी तरफ बिल पास कराने की जटिल प्रक्रिया। अधिकारियों का कहना है कि जो 110 काम पूरे हुए हैं या जो चल रहे हैं, उनके बिल पास करवाने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी को मौके पर ले जाना और फिर विधायक सहित 7 अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाना इतने कम समय में व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल है। इस शर्त के चलते ठेकेदार भुगतान अटकने के डर से परेशान हैं, तो अधिकारी कार्रवाई के खौफ में हैं।

अन्य का भी यही हाल

केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि 470 सड़कों 1050.70 लाख, 13 पुलों 7.80 लाख, 413 आंगनबाड़ीकेन्द्रों 1032.50 लाख और 28 पेयजल/सिंचाई तंत्र 54.37 लाख के रेस्टोरेशन कार्यों के लिए भी यही अल्टीमेटम जारी किया गया है।

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