जहानाबाद जिले के कसवां स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर लापरवाही सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावित दौरे से पहले केंद्र के पीछे खेत में भारी मात्रा में सरकारी दवाएं जली हुई अवस्था में मिलीं। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने जब इन जली हुई दवाओं को देखा तो इसकी सूचना फैल गई। जांच करने पर पाया गया कि इनमें कुछ दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं, जबकि कई दवाओं की वैधता वर्ष 2026 तक थी। इसके बावजूद इन वैध दवाओं को भी जला दिया गया। ग्रामीण विकास कुमार ने आरोप लगाया कि मरीजों को जरूरत के समय दवाएं नहीं दी जातीं। उन्होंने कहा कि रतनी प्रखंड में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित है और इसी दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा आनन-फानन में एक्सपायरी के साथ-साथ वैध दवाओं को भी नष्ट कर दिया गया। एक अन्य ग्रामीण चंदन कुमार के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने के लिए एक मेडिकल टीम का गठन आवश्यक होता है। हालांकि, इस मामले में बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में दवाएं जलाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया है। मामले की जानकारी मिलने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के पीछे दवाएं जलाए जाने की सूचना मिली है। उन्होंने पुष्टि की कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सरकारी दवाओं के रख-रखाव, वितरण प्रणाली और उनके उचित निपटान पर गंभीर सवाल खड़े करती है, खासकर मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले सामने आने से इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। जहानाबाद जिले के कसवां स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर लापरवाही सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावित दौरे से पहले केंद्र के पीछे खेत में भारी मात्रा में सरकारी दवाएं जली हुई अवस्था में मिलीं। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने जब इन जली हुई दवाओं को देखा तो इसकी सूचना फैल गई। जांच करने पर पाया गया कि इनमें कुछ दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं, जबकि कई दवाओं की वैधता वर्ष 2026 तक थी। इसके बावजूद इन वैध दवाओं को भी जला दिया गया। ग्रामीण विकास कुमार ने आरोप लगाया कि मरीजों को जरूरत के समय दवाएं नहीं दी जातीं। उन्होंने कहा कि रतनी प्रखंड में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित है और इसी दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा आनन-फानन में एक्सपायरी के साथ-साथ वैध दवाओं को भी नष्ट कर दिया गया। एक अन्य ग्रामीण चंदन कुमार के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने के लिए एक मेडिकल टीम का गठन आवश्यक होता है। हालांकि, इस मामले में बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में दवाएं जलाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया है। मामले की जानकारी मिलने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के पीछे दवाएं जलाए जाने की सूचना मिली है। उन्होंने पुष्टि की कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सरकारी दवाओं के रख-रखाव, वितरण प्रणाली और उनके उचित निपटान पर गंभीर सवाल खड़े करती है, खासकर मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले सामने आने से इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।


