मुजफ्फरपुर में भारत सरकार की ‘पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत एक विशेष ‘सोलर मेला’ आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य आम जनता को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करना था। इस अवसर पर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने जिले के घरेलू उपभोक्ताओं से सौर ऊर्जा अपनाने और अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की अपील की। मेले को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि योजना का मुख्य लक्ष्य घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने उन उपभोक्ताओं को सम्मानित किया जिनका बिजली बिल सोलर पैनल लगाने के बाद अब शून्य आ रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का आर्थिक बोझ कम करने में भी सहायक है। DM बोले- छत पर सोलर पैनल लगाएं जिलाधिकारी ने योजना की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता अपनी छत पर सोलर पैनल लगाकर उत्पादित बिजली का उपयोग स्वयं कर सकते हैं। अतिरिक्त बिजली को ‘नेट मीटरिंग’ तकनीक के जरिए बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के ग्रिड में भेजा जाता है, जिससे उपभोक्ताओं का मासिक बिल काफी कम हो जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि 1 किलोवाट सोलर पैनल की स्थापना पर लगभग ₹60,000 का खर्च आता है, जिस पर केंद्र सरकार ₹30,000 का अनुदान देती है। 2 किलोवाट के लिए कुल लागत लगभग ₹1,20,000 है, जिस पर ₹60,000 की सब्सिडी उपलब्ध है। योजना के तहत अधिकतम ₹78,000 तक का सरकारी अनुदान हासिल किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि 01 किलोवाट सिस्टम के लिए केवल दो सोलर पैनलों की आवश्यकता होती है। एक पैनल का क्षेत्रफल लगभग 32 वर्ग फीट (8 फीट × 4 फीट) होता है, जो सीमित छत वाले घरों के लिए भी उपयुक्त है। सुरक्षा और भरोसे के दृष्टिकोण से, संवेदक एजेंसी की ओर से 5 साल का मुफ्त रखरखाव (मेंटेनेंस) और सोलर पैनल व इन्वर्टर पर 10 साल की वारंटी प्रदान की जा रही है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मुजफ्फरपुर के सभी निवासियों से आह्वान किया कि वे इस सोलर मेले का फायदा उठाएं, अधिक से अधिक पंजीकरण कराएं और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ती दरों के बीच यह योजना आम आदमी के लिए भविष्य का सबसे बेहतर निवेश है। मुजफ्फरपुर में भारत सरकार की ‘पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत एक विशेष ‘सोलर मेला’ आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य आम जनता को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करना था। इस अवसर पर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने जिले के घरेलू उपभोक्ताओं से सौर ऊर्जा अपनाने और अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की अपील की। मेले को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि योजना का मुख्य लक्ष्य घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने उन उपभोक्ताओं को सम्मानित किया जिनका बिजली बिल सोलर पैनल लगाने के बाद अब शून्य आ रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का आर्थिक बोझ कम करने में भी सहायक है। DM बोले- छत पर सोलर पैनल लगाएं जिलाधिकारी ने योजना की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता अपनी छत पर सोलर पैनल लगाकर उत्पादित बिजली का उपयोग स्वयं कर सकते हैं। अतिरिक्त बिजली को ‘नेट मीटरिंग’ तकनीक के जरिए बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के ग्रिड में भेजा जाता है, जिससे उपभोक्ताओं का मासिक बिल काफी कम हो जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि 1 किलोवाट सोलर पैनल की स्थापना पर लगभग ₹60,000 का खर्च आता है, जिस पर केंद्र सरकार ₹30,000 का अनुदान देती है। 2 किलोवाट के लिए कुल लागत लगभग ₹1,20,000 है, जिस पर ₹60,000 की सब्सिडी उपलब्ध है। योजना के तहत अधिकतम ₹78,000 तक का सरकारी अनुदान हासिल किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि 01 किलोवाट सिस्टम के लिए केवल दो सोलर पैनलों की आवश्यकता होती है। एक पैनल का क्षेत्रफल लगभग 32 वर्ग फीट (8 फीट × 4 फीट) होता है, जो सीमित छत वाले घरों के लिए भी उपयुक्त है। सुरक्षा और भरोसे के दृष्टिकोण से, संवेदक एजेंसी की ओर से 5 साल का मुफ्त रखरखाव (मेंटेनेंस) और सोलर पैनल व इन्वर्टर पर 10 साल की वारंटी प्रदान की जा रही है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मुजफ्फरपुर के सभी निवासियों से आह्वान किया कि वे इस सोलर मेले का फायदा उठाएं, अधिक से अधिक पंजीकरण कराएं और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ती दरों के बीच यह योजना आम आदमी के लिए भविष्य का सबसे बेहतर निवेश है।


