सोचिए, एक अफसर रिटायर होता है। इसमें नियम कहते हैं कि सरकारी बैंक के रिटायर्ड लोगों को दोबारा नौकरी सिर्फ बहुत खास हालात में मिलनी चाहिए। लेकिन वही अफसर पहले सलाहकार बनता है, फिर बड़े पद पर कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल हो जाता है और फिर उसका कार्यकाल इतना बढ़ता है कि वो 65 साल की उम्र के बाद भी कुर्सी पर जमा रहता है। और तनख्वाह? पहले 65 लाख सालाना, फिर 2 करोड़ रुपये से भी ऊपर। जी हां, यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मामला है और अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला?
राज कुमार शर्मा नाम के एक शख्स ने कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने SBI और उस रिटायर्ड अफसर को कठघरे में खड़ा किया है जिन्हें बैंक में हेड (लीगल) के पद पर ठेके के आधार पर रखा गया है।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने बुधवार को इस मामले में SBI और संबंधित अफसर को नोटिस जारी किया है। वो रिटायर्ड अफसर 1978 में SBI में भर्ती हुए थे। 31 जुलाई 2018 को 60 साल की उम्र में रिटायर हो गए।
रिटायरमेंट के बाद उसी साल उन्हें सलाहकार बना दिया गया। 2019 में एक विज्ञापन के जरिए उन्हें ठेके पर हेड (लीगल) नियुक्त किया गया और उनका कार्यकाल अब 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यानी 65 साल की उम्र के बाद भी।
नियम तो कुछ और कहते हैं
वित्त मंत्रालय ने 2008 और 2015 में साफ सर्कुलर जारी किए थे कि सरकारी बैंकों के रिटायर्ड अफसरों को दोबारा नौकरी सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में दी जा सकती है। लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नियमों को ताक पर रखकर यह नियुक्ति की गई।
याचिकाकर्ता के वकील हर्ष चोपड़ा ने दलील दी कि यह पद संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत एक सार्वजनिक पद है। मतलब इसे भरने के लिए पारदर्शी और नियमित चयन प्रक्रिया होनी चाहिए थी। सीधे किसी रिटायर्ड अफसर को बिठा देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है जो समानता और सरकारी नौकरी में बराबर मौके की बात करते हैं।
काबिल कर्मचारी हाथ मलते रह गए
याचिका में एक और अहम बात कही गई है। SBI में ऐसे कई अनुभवी और योग्य कर्मचारी हैं जो इस पद के लिए उपयुक्त थे। उनका करियर आगे बढ़ सकता था। लेकिन जब एक रिटायर्ड अफसर ही बाहर से ठेके पर ले आए जाएंगे तो अंदर के कर्मचारी बेचारे हाथ मलते रह जाएंगे। न प्रमोशन, न तरक्की।
RTI का भी दरवाजा बंद
मामले में और भी दिलचस्प मोड़ है। याचिकाकर्ता ने इस नियुक्ति की जानकारी RTI के जरिए मांगी थी। लेकिन 10 दिसंबर 2024 को आवेदन ही खारिज कर दिया गया।
अब कोर्ट से मांग की गई है कि न सिर्फ इस नियुक्ति को रद्द किया जाए बल्कि पूरे चयन की जांच भी हो और सारे दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
यूनियन ऑफ इंडिया की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन और वकील करणवीर सिंह कठूरिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। अब मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। देखना होगा कि SBI इस पर क्या सफाई देता है।


