Gmail Launch History 1 April 2004: आज से 22 साल पहले, जब पूरी दुनिया 1 अप्रैल को अप्रैल फूल मना रही थी, तभी गूगल ने 1 अप्रैल 2004 को अपनी ईमेल सर्विस Gmail लॉन्च करने का एलान किया। इस दिन अप्रैल फूल होने की वजह से बहुत से लोगों को लगा कि गूगल कोई मजाक कर रहा है, क्योंकि गूगल और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां अक्सर इस तरह के प्रैंक करती रहती हैं। इसीलिए किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो सुविधाएं गूगल देने की बात कर रहा है, वे सच में मुमकिन हैं। लेकिन यह कोई मजाक नहीं, बल्कि एक ऐसी शुरुआत थी जिसने मैसेज भेजने और पाने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया, खासकर कामकाज से जुड़े लोगों के जीवन को। आइए जानते हैं कि जीमेल की शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी।
जीमेल से हुई मेल डिलीट करने की टेंशन खत्म
जीमेल के आने से पहले हॉटमेल और याहू जैसी बड़ी कंपनियां ईमेल के लिए बहुत कम जगह देती थीं। उस समय सिर्फ 2 से 4 MB का स्टोरेज मिलता था, जिसमें थोड़े से मेल आते ही इनबॉक्स फुल हो जाता था। ऐसे में गूगल ने सीधे 1 GB स्टोरेज देने का वादा किया, जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी बात थी। इसके बाद लोगों को इस बात की फिक्र नहीं रही कि नया मेल पाने के लिए पुराना मेल डिलीट करना पड़ेगा।
ईमेल ढूंढना हुआ बच्चों का खेल
दूसरे सर्च इंजन की तुलना में गूगल शुरू से ही अपनी सर्च पावर के लिए जाना जाता था, इसलिए उन्होंने यही तकनीक जीमेल के अंदर भी डाल दी। पहले के ईमेल में किसी पुराने मैसेज को ढूंढना पहाड़ खोदने जैसा मुश्किल काम था, लेकिन जीमेल में एक सर्च बार दिया गया जिससे कोई भी पुराना ईमेल सेकंडों में ढूंढा जा सकता था। इसके साथ ही, जीमेल ने बातचीत को और आसान बनाने के लिए थ्रेड यानी चैट की शुरुआत की, जिससे पूरी बातचीत एक ही जगह व्यवस्थित रहने लगी।
हर किसी को नहीं मिलता था जीमेल
आज के समय में जीमेल पर अकाउंट बनाना जितना आसान है, शुरुआत के दिनों में वैसा नहीं था। तब इसके लिए इनविटेशन की जरूरत होती थी। यानी अगर आपके किसी दोस्त के पास पहले से जीमेल अकाउंट है, तो ही वह आपको इनवाइट भेज सकता था। इस वजह से लोगों के बीच जीमेल को लेकर एक अलग ही क्रेज बन गया था। लेकिन धीरे-धीरे जब यह सबके लिए खुला, तो इसने दूसरी सभी ईमेल सेवाओं को पीछे छोड़ दिया।
जीवन का अहम हिस्सा है जीमेल
आज के समय में चाहे फोन में लॉगिन करना हो, यूट्यूब चलाना हो या ऑफिस का काम, हर जगह जीमेल आईडी काम आती है। इसके बिना इंटरनेट की कल्पना करना भी मुश्किल है। जो सर्विस एक मजाक के रूप में शुरू हुई थी, उसने आज पूरी दुनिया को आपस में जोड़ रखा है।


