अजमेर (तबीजी)। राजस्थान के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। शनिवार को अजमेर स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान (NRCSS), तबीजी में आयोजित ‘इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेला-2026’ में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि कैसे उन्नत बीज और आधुनिक प्रसंस्करण (Processing) के जरिए किसानों की आय को दोगुना और तिगुना किया जा सके।
बीजीय मसालों से खुलेगी किस्मत, केंद्रीय मंत्री का विजन
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि राजस्थान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों के लिए जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी और अजवाइन जैसी फसलें वरदान साबित हो रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “अनुसंधान और आधुनिक तकनीक जब खेतों तक पहुँचेगी, तभी किसानों की आय में वास्तविक और उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”

उन्होंने वैज्ञानिकों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई ताकि नई तकनीकें प्रयोगशाला से सीधे किसान के खेत तक पहुँच सकें।
नागौरी पान मेथी और राजस्थानी लाल मिर्च पर होगा विशेष शोध
मेले के दौरान किसानों के लिए सबसे बड़ी घोषणा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने की। उन्होंने बताया कि अब राजस्थान के विशिष्ट उत्पादों पर अनुसंधान का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- पान मेथी: नागौर की प्रसिद्ध पान मेथी को अब स्थानीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र की सूची में शामिल कर इस पर विशेष शोध किया जाएगा।
- लाल मिर्च: राजस्थानी सूखी लाल मिर्च की गुणवत्ता और उत्पादन सुधारने के लिए नई तकनीकें विकसित की जाएंगी।
- अजमेर बनेगा हब: अजमेर में प्राकृतिक और जैविक खेती से मसाला उत्पादन का ‘उत्कृष्ट केंद्र’ बनने की प्रबल संभावना है।
कोटा बनेगा ‘धनिया हब’ और जोधपुर में ‘जीरा क्लस्टर’
राजस्थान के अलग-अलग जिलों को विशिष्ट मसालों के केंद्र (Hub) के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है:
- कोटा: धनिया के बीजों के लिए कोटा को एक बड़े हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि भारत को धनिया बीज आयात करने की जरूरत न पड़े।
- जोधपुर: अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जे.पी. मिश्रा के अनुसार, जोधपुर में जीरा उत्पादन के लिए विशेष ‘क्लस्टर’ बनाकर नई प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान
बढ़ती गर्मी और मिट्टी के बदलते पीएच (क्षारीय और अम्लीय) स्तर को देखते हुए वैज्ञानिकों ने नई किस्मों पर काम शुरू कर दिया है। डॉ. मांगीलाल जाट ने बताया कि अब ऐसी किस्में विकसित की जा रही हैं जो अधिक गर्मी और प्रतिकूल मिट्टी में भी बम्पर पैदावार देंगी। इससे किसानों का जोखिम कम होगा और आय स्थिर रहेगी।

प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन: मुनाफे का मंत्र
मेले में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसान केवल कच्चा माल न बेचें।
- उद्घाटन: केंद्रीय मंत्री ने बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया, जो किसानों को अपने उत्पादों की सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग में मदद करेगी।
- वैल्यू एडिशन: जब किसान अपने मसालों को पैक करके या उनका पाउडर बनाकर बाजार में लाएगा, तो उसे बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और सीधा मुनाफा होगा।


