Rajasthan News: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने ‘अंत्योदय’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए एक नया कीर्तिमान रच दिया है। प्रदेश में जरूरतमंदों को सम्मान के साथ भरपेट भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना’ अब सुशासन और करुणा की नई पहचान बन गई है। आंकड़ों की बात करें तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अब तक 11.94 करोड़ से अधिक भोजन थालियाँ परोसी जा चुकी हैं, जो अपने आप में एक मिसाल है।
थाली का बढ़ा वजन, पोषण के साथ बढ़ा मान
डबल इंजन सरकार ने न केवल भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित की है, बल्कि इसकी गुणवत्ता और मात्रा में भी बड़ा बदलाव किया है। पूर्व में मिलने वाली 500 ग्राम की थाली को बढ़ाकर अब 600 ग्राम कर दिया गया है।
अब थाली में क्या-क्या मिलेगा?
सरकार ने थाली के मेन्यू को और भी पौष्टिक बना दिया है। इसमें अब:
- 100 ग्राम दाल और 100 ग्राम ताजी सब्जी।
- 300 ग्राम चपाती और अचार।
- 100 ग्राम चावल या फिर राजस्थान की शान ‘श्री अन्न’ (बाजरा/ज्वार की खिचड़ी)।
मोटे अनाज (मिलेट्स) को मिला बढ़ावा
इस योजना की सबसे खास बात ‘श्री अन्न’ का समावेश है। बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाजों को भोजन में शामिल कर सरकार ने पोषण सुरक्षा (Nutrition Security) की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। इससे न केवल आमजन को सेहतमंद खाना मिल रहा है, बल्कि स्थानीय किसानों को भी उनकी उपज का सही मोल और प्रोत्साहन मिल रहा है।
बजट में बढ़ोतरी: ₹17 से बढ़कर ₹22 हुआ अनुदान
मुख्यमंत्री ने प्रति थाली अनुदान राशि को 17 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये कर दिया है। वर्तमान में राजस्थान के 230 नगरीय निकायों में 992 अन्नपूर्णा रसोईयाँ सफलतापूर्वक चल रही हैं। इतना ही नहीं, सरकार अब नवगठित 79 नगरीय निकायों में भी नई रसोईयाँ शुरू करने की प्रक्रिया में है। - बिना भेदभाव, सबको सम्मान
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना की सार्वभौमिकता इसे खास बनाती है। यहाँ कोई भी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के ससम्मान भोजन प्राप्त कर सकता है। यह योजना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। आने वाले समय में यह योजना प्रदेश में सुशासन और मानवीय मूल्यों का सबसे बड़ा चेहरा बनी रहेगी।


