Udaipur: राजस्थान में सरकारी सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश के बस स्टैंड्स की अब पुरानी और जर्जर सूरत बदलने वाली है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने उदयपुर समेत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों के बस अड्डों को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने की तैयारी पूरी कर ली है।
बता दें कि करीब 300 करोड़ रुपए के इस मेगा प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर धरातल पर उतारा जाएगा। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बस स्टैंड अब सिर्फ बस पकड़ने की जगह नहीं रहेंगे। इन्हें एक ‘मल्टी-परपज हब’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है।
पूरी तरह बसों के संचालन और यात्रियों के आवागमन के लिए सुरक्षित रहेगा। यहां रोडवेज के प्रशासनिक ऑफिस बनाए जाएंगे। यहां प्राइवेट निवेश के जरिए होटल, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और कॉर्पोरेट ऑफिस खोले जाएंगे।
उदयपुर बस स्टैंड का खास ‘टूरिस्ट स्पेशल’ डिजाइन
झीलों की नगरी उदयपुर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है। इसे ध्यान में रखते हुए उदयपुर डिपो के प्रबंधक हेमंत शर्मा ने बताया कि यहां के बस स्टैंड को 16,788 वर्गमीटर जमीन पर पुनर्विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की भारी संख्या को देखते हुए यहां डिजिटल सेवाओं, आधुनिक वेटिंग लाउंज और हाईटेक पार्किंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शहर के मुख्य केंद्र में होने के कारण इसे काफी व्यवस्थित और आकर्षक लुक दिया जाएगा।
किन शहरों की कितनी जमीन पर मचेगी चमक?
इस प्रोजेक्ट में बीकानेर के बस स्टैंड को सबसे बड़ा क्षेत्र मिला है। नीचे देखें किस शहर में कितनी जमीन पर विकास कार्य होगा।
- बीकानेर में 40,000 वर्गमीटर
- भरतपुर में 30,917 वर्गमीटर
- भीलवाड़ा में 28,198 वर्गमीटर
- अजमेर में 24,767 वर्गमीटर
- ब्यावर में 24,404 वर्गमीटर
- बूंदी में 20,982 वर्गमीटर
- उदयपुर में 16,788 वर्गमीटर
- चित्तौड़गढ़ में 15,124 वर्गमीटर
अगले हफ्ते लगेगी मुहर, फिर शुरू होगा काम
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, जयपुर मुख्यालय में इन प्रपोजल्स पर मंथन अंतिम चरण में है। एक विशेष कमेटी फिलहाल बिडर्स (बोलीदाताओं) की तकनीकी योग्यता और उनके इनोवेटिव आइडियाज की जांच कर रही है। अगले हफ्ते फाइनल प्लान राज्य सरकार को भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
यात्रियों को क्या होगा सीधा फायदा?
यात्रियों को बैठने के लिए एसी वेटिंग हॉल और साफ-सुथरे टॉयलेट्स मिलेंगे। कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने से रोडवेज की आय में इजाफा होगा, जिससे बसों के रखरखाव में सुधार होगा। डिजिटल बोर्ड, सुव्यवस्थित ट्रैफिक मैनेजमेंट और हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम से यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी।


