अवैध मुरम के नाम पर उजाड़ी जा रही शहर के आसपास की आठ बंजर पहाड़ियों की रंगत इस साल बदली जाएगी। स्कूल, कॉलेज, एनजीओ, बीएसएफ, सशस्त्र बलों के जवानों की मदद से इन पथरीली पहाड़ियों को पानीदार बनाने के लिए कंटूर खोदे जाएंगे। जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां हरियाली महोत्सव चलाया जाएगा। पितृ पर्वत की तरह लोग इन पहाड़ियों पर पौधे लगाकर उनकी देखभाल कर सकेंगे। यहां 5 लाख पौधे रोपे जाएंगे। डीएफओ लाल सुधाकर सिंह के मुताबिक अभी आठ पहाड़ियां चिह्नित की गई हैं। महू, मानपुर, चोरल क्षेत्र में भी ऐसे स्थान मिलते हैं तो इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। सबसे पहले इन पहाड़ियों पर तार फेंसिंग की जाएगी। मजदूरों की मदद से जगह-जगह छोटे कंटूर बनाए जाएंगे ताकि पहाड़ी से बहकर पानी अंदर चला जाए। देवगुराड़िया में पहले यह प्रयोग किया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि अब यहां सालभर हरियाली दिखती है। नीचे बने तालाब में भी जनवरी तक पानी रहता है। जून-जुलाई में इन पहाड़ियों पर चलेगा पौधारोपण अभियान रेंजर संगीता ठाकुर के मुताबिक दतुनी, रणभंवर, रेणुका, असरावद, उमरिया, पालिया, माचल, सांवेर स्थित कुछ छोटी पहाड़ियों को अभियान चलाकर हरा-भरा किया जाएगा। दतुनी में काम शुरू कर दिया है। रेणुका और रणभंवर की तार फेंसिंग की गई है। मई-जून से पौधों के लिए गड्डे खोदना शुरू किए जाएंगे। गर्मी में मिट्टी का ट्रीटमेंट धूप से हो जाएगा तो पौधों के पनपने के आसार और बढ़ जाएंगे। कोर्ट के आदेश के बाद भी खनन जारी
इंदौर खंडपीठ के तत्कालीन प्रशासनिक जज सतीशचंद्र शर्मा की खंडपीठ ने इंदौर के साथ ही देवास जिले तक की पहाड़ियों को खनन के नाम पर खत्म किए जाने को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। खनिज विभाग को आदेश दिए थे कि तत्काल प्रभाव से खनन बंद कराया जाए। देपालपुर, सांवेर, हातोद तरफ सभी खदानें बंद कर दी गई थीं, लेकिन पिछले एक-दो साल से फिर जमकर खनन हो रहा है। निर्माणाधीन सड़कों का भराव आसपास की पहाड़ियों को खोदकर किया जा रहा है। चोरल में भी चलेगा अभियान
रेंजर सचिन वर्मा के मुताबिक 12 हजार हेक्टेयर में रेंज फैली है। यहां पर खाली वन क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है। गर्मियों में जमीन का ट्रीटमेंट किया जाएगा। पौधे लगाने से पहले तार फेंसिंग की जाएगी। इसके बाद पौधे लगाए जाएंगे। चोरल का जंगल इंदौर सिटी के लिए महत्वपूर्ण है। यह लंग्स की तरह काम करता है।


