गोल्ड सिल्वर रेश्यो बता रहा सोना खरीदें या चांदी, जानिए क्या बैठ रहे समीकरण

गोल्ड सिल्वर रेश्यो बता रहा सोना खरीदें या चांदी, जानिए क्या बैठ रहे समीकरण

सोना और चांदी दोनों ही कीमती मेटल है, लेकिन फिलहाल सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ गई हैं। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट आई है। इसके चलते सोने-चांदी का अनुपात 60 से ऊपर पहुंच गया है। वेस्ट एशिया की जंग, बढ़ता क्रूड, मजबूत डॉलर और फेड का हॉकिश रुख इन सभी ने सोने और चांदी दोनों को उनके रिकॉर्ड हाई से नीचे धकेल दिया है। लेकिन इस उठापटक के बीच एक सवाल यह है कि अभी क्या करें यानी सोना-चांदी खरीदें या बेचें? गोल्ड-सिल्वर रेश्यो इसी सवाल का जवाब देता है। यह रेश्यो अभी 63.18 पर है।

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो क्या होता है?

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो एक बेहद सरल लेकिन बेहद काम का पैमाना है। इसे निकालने का तरीका भी आसान है, सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग दे दो। अभी सोना 4,424 डॉलर प्रति औंस है और चांदी 70.01 डॉलर प्रति औंस। इन्हें भाग करने पर 63.18 आता है। इसका मतलब है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए आपको करीब 63 औंस चांदी बेचनी होगी। रेश्यो जितना ऊंचा होगा, उतना सोना महंगा और चांदी सस्ती। रेश्यो जितना नीचे होगा उतनी चांदी महंगी और सोना सस्ता।

बेहद रोमांचक रही है चांदी की कहानी

चांदी की कहानी पिछले डेढ़ साल में बेहद रोमांचक रही है। अप्रैल 2025 में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 100 से ऊपर था यानी चांदी बेहद सस्ती थी। फिर चांदी ने जोरदार वापसी की और रेश्यो जनवरी 2026 की शुरुआत में 45 से नीचे आ गया। यानी चांदी ने 135-150 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया। लेकिन अब तस्वीर पलट गई है। रेश्यो वापस 63 पर आ गया है और चांदी इस साल 8 फीसदी गिर चुकी है।

बोनान्जा के सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निर्पेंद्र यादव के मुताबिक शॉर्ट टर्म में यानी 1 से 3 महीने में रेश्यो और ऊपर जाएगा जिसका मतलब है चांदी सोने से कमजोर रहेगी। लेकिन मीडियम टर्म में यानी 6 से 12 महीने में रेश्यो फिर गिरेगा और चांदी की कैच-अप ट्रेड फिर शुरू होगी।

सोना खरीदें या चांदी?

INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी का अनुमान है कि तीन बड़े कारण हैं जो नियर टर्म में रेश्यो को 70-75 तक ले जाएंगे, जिसके चलते सोना खरीदना चाहिए।

  1. होर्मुज की खाड़ी अभी भी बाधित है और जब तक यह नहीं खुलती एनर्जी क्राइसिस बना रहेगा।
  2. US Fed 3.50-3.75 फीसदी की दर पर हॉकिश रुख के साथ टिका हुआ है यानी ब्याज दर में कटौती की उम्मीद फिलहाल खत्म है।
  3. ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग PMI कमजोर पड़ रहा है यानी इंडस्ट्रियल डिमांड घट रही है जो सीधे चांदी को नुकसान पहुंचाता है।

दसानी कहते हैं कि रेश्यो 60 से नीचे वापस जाने के लिए या तो सीजफायर होना जरूरी है या सोलर सप्लाई चेन से चांदी की भारी फिजिकल खरीदारी। फिलहाल दोनों की संभावना कम है। इसलिए शॉर्ट टर्म में सोना मजबूत रहेगा और चांदी दबाव में रहने की संभावना है।

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