भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी ने सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम भी गिरा दिए हैं। आमतौर पर युद्ध जैसी स्थिति इन धातुओं को सुरक्षित निवेश के रुप में दिखाती है, और इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है, जबकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि सोने-चांदी जैसी मेटल में अभी और गिरावट देखी जा सकती है।
पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। MCX पर सोना 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि COMEX पर इसकी कीमत 4,574.90 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रही, जबकि युद्ध की शुरुआत में सोना 1,60,000 रुपये के आसपास था। लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर की वजह से सोने पर भारी दबाव बना।
क्यों चल रहा है सोना उल्टी चाल?
आमतौर पर जंग के माहौल में सोना चढ़ता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा। SEBI रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक इसकी वजह है महंगाई का डर। अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ने के बाद वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में रिस्क प्रीमियम काफी बढ़ गया है और क्रूड की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ रहा है, खासकर फ्यूल और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट के जरिए।
बढ़ते क्रूड की वजह से ग्लोबल इन्फ्लेशन बढ़ने की आशंका है, और इस स्थिति में दुनिया के सेंट्रल बैंकों के पास ब्याज दरें बढ़ाने या स्थिर रखने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। पिछले हफ्ते अमेरिकी फेड, बैंक ऑफ जापान, बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड सभी ने कॉशस-टू-हॉकिश यानी सतर्क से सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए। आसान भाषा में समझें तो सोने चांदी की कीमतें अब केवल युद्ध के कारण ही नहीं बल्कि महंगाई, ऊर्जा बाजार और मौद्रिक नीति पर निर्भर करती हैं।
अमेरिकी डॉलर ने डाला दोहरा दबाव
एसएस वेल्थस्ट्रीट (SS WealthStreet) की फाउंडर सुगंधा सचदेवा कहती हैं कि पहले मार्केट को उम्मीद थी कि फेड रेट कट करेगा, लेकिन अब नैरेटिव बदलकर “हायर-फॉर-लॉन्गर” हो गया है। यानी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, और अगर महंगाई और बढ़ी तो रेट हाइक भी हो सकता है। ECB, बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंग्लैंड भी टाइटर मॉनेटरी कंडीशन यानी कि ब्याज दरों को बढ़ाने और धन आपूर्ति (Money Supply) को कम करने की ओर ध्यान दे रहे है।
ब्याज दरों को लेकर बदले माहौल ने डॉलर इंडेक्स को मजबूती दी है। डॉलर इंडेक्स 95.50 के स्तर से उछलकर 100 के ऊपर पहुंच गया है। मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी यील्ड ने सोने पर दोहरा दबाव बनाया है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में करेक्शन की वजह से मार्जिन कॉल्स आईं और लिक्विडिटी की जरूरत पड़ी, जिससे गोल्ड में लॉन्ग पोजीशन की भारी लिक्विडेशन हुई।
1,27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिरावट संभव
आगे की बात करें तो एलकेपी सिक्योरिटीज (LKP Securities) के VP रिसर्च जतीन त्रिवेदी का कहना है कि नियर-टर्म में सोने की ट्रेडिंग रेंज 1,40,000 से 1,47,000 रुपये के बीच रह सकती है।
सुगंधा सचदेवा के मुताबिक इस वक्त सोने के सामने 5,420 से 5,450 डॉलर प्रति औंस का एक मजबूत रुकावट का दायरा है। यानी सोने के इस लेवल पर बिकवाली का दबाव आ जाता है और कीमत वापस नीचे गिर जाती है। इससे पहले सोने को 5,280 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकना जरूरी है। अगर सोना यहां टिक गया, तभी तेजी की उम्मीद बनेगी। लेकिन अगर यह लेवल भी नहीं संभला, तो फिर गिरावट का रास्ता खुल जाएगा। और अगर गिरावट आई, तो सोना 4,250 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क सकता है।
इसके अलावा MCX पर 1,70,000 रुपये पर कड़ा रेजिस्टेंस है और 1,65,000 रुपये अहम पिवट लेवल है। अगर सोना इन लेवल्स को रिक्लेम नहीं कर पाया, तो 1,35,000 रुपये और यहां तक कि 1,27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर सकता है।


