गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से लोक कलाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ’’लोक में कोहबर कला” प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शनी दो दिनों तक चला। जिसमें गोरखपुर और बस्ती मंडल के 30 लोगों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान युवा कलाकारों ने कोहबर कला के विविध रूपों को कैनवास पर खूबसूरती से उकेरा और अपनी हुनर का प्रदर्शन किया। एक से बढ़कर एक कलाकृतियां देखने को मिली, जिसने दर्शकों को मोहित किया। महापौर ने किया शुभारंभ प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. यशवन्त सिंह राठौर ने कार्यशाला की विस्तृत जानकारी के साथ अतिथि का स्वागत किया। कोबहर कला लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर
अपने उद्धबोधन में महापौर ने कहा कि कोबहर कला हमारी लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। इस कला के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक सम्पदा की जड़ों से जुड़ते हैं। उन्होंने बौद्ध संग्रहालय के इस प्रयास को उत्कृष्ठ और सराहनीय कहा। कलाकारों में अद्भुत हुनर है मुख्य प्रशिक्षक उत्तर प्रदेश लोक और जनजातीय संस्कृति संस्थान, लखनऊ की सदस्य डॉ. कुमुद सिंह ने कहा कि सभी कलाकारों में अद्भुत हुनर है। आवश्यकता है इन्हें समय-समय पर तरासने की, जो कि राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर की ओर से निरंतर किया जा रहा है। सम्मानित हुए कलाकार
इस मौके पर चयनित 05 प्रतिभागियों को कोहबर कला की उत्कृष्ट कला कृतियां बनाने के लिए विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यशाला में शमिल गोरखपुर व बस्ती मण्डल के सभी 30 कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। इन्हें मिला विशिष्ट कलाकार सम्मान
1.शिवम कुमार गुप्ता
2.विष्णुदेव शर्मा
3.प्राची पाठक
4.समीर रंजन
5.नीशू यादव कार्यक्रम के संयोजक और संचालक प्रेमनाथ ने सभी कलाकारों, अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर डॉ. विनीता गुप्ता, रेनू लता पाठक, कुलवन्त सिंह, आस्था यादव, डॉ. रोली तिवारी, मोहन कुमार यादव, मलय मिश्र, मनीष तिवारी, वन्दना दास, आदित्य कुमार वर्मा, निवेदिता यादव मौजूद रहे।


