नालंदा जिले की छात्राओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलने जा रहे हैं। केंद्रीय बजट में प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय के साथ ही बिहार सरकार ने भी वंचित वर्ग की छात्राओं के लिए विशेष हॉस्टल निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी है। सावित्रीबाई फुले छात्रावास जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्राओं के लिए पांच करोड़ रुपए की लागत से 100 छात्राओं की क्षमता वाले सावित्रीबाई फुले बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शहर के करगिल चौक के निकट एक एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है। जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कैबिनेट से छात्रावास निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। बिहारशरीफ सर्कल ऑफिसर की ओर से भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन मंजिला भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा छात्रावास छात्रावास में छात्राओं को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खेलकूद के लिए खेल मैदान, सुसज्जित पुस्तकालय और आधुनिक अध्ययन कक्षों की व्यवस्था की जाएगी। निशुल्क आवास सुविधा के साथ-साथ अनाज और अनुदान राशि भी प्रदान की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास में पुख्ता व्यवस्था रहेगी। गेट पर ही आगंतुकों का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। जिले का पहला बालिका छात्रावास नालंदा जिले में अभी तक छात्राओं के लिए एक भी छात्रावास नहीं था। यह जिले का पहला बालिका छात्रावास होगा, जो वंचित वर्ग की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्ग प्रशस्त करेगा। हालांकि, राजगीर में डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में अनुसूचित जाति और जनजाति की 600 छात्राएं पहली से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब तक कोई छात्रावास सुविधा नहीं थी। केंद्रीय बजट से मिलेगी और मजबूती केंद्रीय बजट में बिहार के प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय से इस दिशा में और गति आएगी। इस छात्रावास की खास बात यह होगी कि इसमें सभी समाज और वर्ग की बालिकाएं एक साथ रहकर नीट, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगी। इसके लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा में समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने इसे बेहद सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि दोनों छात्रावासों के निर्माण से न केवल वंचित वर्ग की छात्राओं को लाभ मिलेगा, बल्कि जिले की सभी वर्गों की बालिकाएं उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकेंगी। नालंदा जिले की छात्राओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलने जा रहे हैं। केंद्रीय बजट में प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय के साथ ही बिहार सरकार ने भी वंचित वर्ग की छात्राओं के लिए विशेष हॉस्टल निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी है। सावित्रीबाई फुले छात्रावास जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्राओं के लिए पांच करोड़ रुपए की लागत से 100 छात्राओं की क्षमता वाले सावित्रीबाई फुले बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शहर के करगिल चौक के निकट एक एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है। जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कैबिनेट से छात्रावास निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। बिहारशरीफ सर्कल ऑफिसर की ओर से भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन मंजिला भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा छात्रावास छात्रावास में छात्राओं को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खेलकूद के लिए खेल मैदान, सुसज्जित पुस्तकालय और आधुनिक अध्ययन कक्षों की व्यवस्था की जाएगी। निशुल्क आवास सुविधा के साथ-साथ अनाज और अनुदान राशि भी प्रदान की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास में पुख्ता व्यवस्था रहेगी। गेट पर ही आगंतुकों का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। जिले का पहला बालिका छात्रावास नालंदा जिले में अभी तक छात्राओं के लिए एक भी छात्रावास नहीं था। यह जिले का पहला बालिका छात्रावास होगा, जो वंचित वर्ग की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्ग प्रशस्त करेगा। हालांकि, राजगीर में डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में अनुसूचित जाति और जनजाति की 600 छात्राएं पहली से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब तक कोई छात्रावास सुविधा नहीं थी। केंद्रीय बजट से मिलेगी और मजबूती केंद्रीय बजट में बिहार के प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय से इस दिशा में और गति आएगी। इस छात्रावास की खास बात यह होगी कि इसमें सभी समाज और वर्ग की बालिकाएं एक साथ रहकर नीट, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगी। इसके लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा में समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने इसे बेहद सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि दोनों छात्रावासों के निर्माण से न केवल वंचित वर्ग की छात्राओं को लाभ मिलेगा, बल्कि जिले की सभी वर्गों की बालिकाएं उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकेंगी।


