Delhi Metro Girls Abusing Viral Video: दिल्ली मेट्रो के महिला कोच का एक वीडियो मंगलवार शाम से ही काफी वायरल हो रहा है। महिला कोच के अंदर चार नाबालिग लड़कियों के बर्ताव से जुड़ा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने न सिर्फ यात्रियों को असहज किया बल्कि समाज में बच्चों की बदलती सोच और व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला? (Delhi Metro Girls Abusing Viral Video)
बताया जा रहा है कि ये घटना रविवार शाम के समय की है, जब एक महिला यात्री हौज खास स्टेशन से महिला कोच में सवार हुईं। उनके मुताबिक, कोच में पहले से मौजूद चार किशोरियां फर्श पर बैठकर तेज आवाज में बातचीत कर रही थीं और माहौल को हल्का-फुल्का बनाने की बजाय लगातार शोर और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं। शुरुआत में यात्रियों ने इसे सामान्य शरारत समझकर अनदेखा किया, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति गंभीर होती चली गई।
लड़कियों ने कोच में मचाया आतंक
चश्मदीदों का कहना है कि लड़कियों ने कोच में मौजूद दूसरी महिलाओं पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना शुरू कर दिया। एक महिला यात्री के पहनावे और व्यक्तित्व पर की गई टिप्पणियों ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। जब कुछ यात्रियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, तो उन्होंने उल्टा तीखी प्रतिक्रिया दी और अपशब्दों का प्रयोग जारी रखा। इससे कई महिलाएं अपनी सीट बदलने पर मजबूर हो गईं।
घटना से आहत एक यात्री ने बताया कि इतनी कम उम्र में इस तरह की भाषा और व्यवहार देखना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
लोगों ने जाहिर किया गुस्सा (Delhi Metro Girls Abusing Viral Video)
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा देखने को मिला। कई यूजर्स ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाबालिग होने का मतलब यह नहीं कि अनुशासनहीन व्यवहार को नजरअंदाज कर दिया जाए।
सुंबुल तौकीर खान ने दिया रिएक्शन
इस पूरे मामले पर टीवी अभिनेत्री सुंबुल तौकीर खान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस स्थिति पर गुस्सा किया जाए या ऐसी परवरिश पर दुख जताया जाए। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित परिवार इस वीडियो को देखकर जरूरी कदम उठाएंगे।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग न्यायिक प्रक्रिया लागू होती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर काउंसलिंग और अभिभावकों की भूमिका अहम मानी जाती है। जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।


