अहमदाबाद शहर के सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने अत्याधुनिक चिकित्सा कौशल का अनूठा उदाहरण करते हुए दो मासूमों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। एक बालिका के शरीर से एयरगन की पेलेट (गोली) निकाली गई, तो दूसरे बच्चे की सांसनली में फंसा पत्थर हटाकर उसे नया जीवन दिया गया। दोनों ही ऑपरेशन नि:शुल्क किए गए।बनासकांठा जिले के किसान परिवार की एक वर्षीय बालिका के सीने में एयरगन से छूटी पेलेट (गोली) लगने के चलते उसे अस्पताल में लाया गया। बताया गया है कि गत 23 फरवरी की रात उसके पांच वर्षीय बड़े भाई से खेलते हुए एयरगन का ट्रिगर दब गया और उसे छूटा उसकी छाती में जा धंसी। पालनपुर सिविल से अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर की गई बच्ची की जांच में पता चला कि पेलेट रीढ़ की हड्डी के बेहद करीब फंसी है। 26 फरवरी को पेडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.. राकेश जोशी और उनकी टीम ने थोराकोस्कोपी से जटिल ऑपरेशन कर गोली निकाली। गुरुवार को उसे अच्छी हालत में छुट्टी दे दी गई।
मिट्टी खाते समय बच्चे की सांसनली तक पहुंचा कंकड़
दूसरा मामला अहमदाबाद के रामोल क्षेत्र का है। दिहाड़ी मजदूर परिवार के एक बच्चे को गत 19 फरवरी को अस्पताल लाया गया था। परिजनों का कहना है कि मिट्टी खाते समय अचानक खांसने लगा और उसकी हालत बिगड़ती गई। निजी अस्पतालों में उसे न्यूमोनिया समझकर इलाज किया गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। बाद में सोला सिविल में वेंटिलेटर पर रखा गया और सीटी स्कैन से पता चला कि उसकी सांसनली में कंकड़ फंसा है। 26 फरवरी को अहमदाबाद सिविल में डाॅ. राकेश जोशी, डॉ. सीमा गांधी और टीम ने वेंटिलेटर सपोर्ट पर ही ऑपरेशन कर पत्थर निकाला। इसके बाद बच्चे की स्थिति सुधरी और उसे नया जीवन मिला।
सिविल अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. राकेश जोशी ने कहा कि दोनों ही मामलों में पूरी उपचार प्रक्रिया मुफ्त रही। यह केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और दक्षता की जीत है। उन्होंने माता-पिता को संदेश दिया कि बच्चों को कभी अकेला न छोड़ें और एयरगन, सिक्के, बटन सेल या छोटे पत्थर जैसी वस्तुएं उनकी पहुंच से दूर रखें। इन दोनों घटनाओं ने साबित कर दिया कि सिविल अस्पताल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आशा का केंद्र है, जहां आधुनिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सा कर्मी हैं।


