Ghost Built Temple: मध्य प्रदेश के मुरैना में एक ऐसा मंदिर है, जिसका रहस्य बड़े-बड़े इंजीनियर भी आज तक नहीं सुलझा पाए हैं। 11वीं सदी के इस मंदिर में न तो सीमेंट लगा है और न ही मिट्टी या चूने का इस्तेमाल हुआ है। यह मंदिर सिर्फ पत्थरों पर बैलेंस करके खड़ा किया गया है। 100 फीट ऊंचे इस ढांचे को देखकर ऐसा लगता है कि यह अभी गिर जाएगा, लेकिन 1000 साल से तूफान भी इसे हिला नहीं पाए। गांव वाले कहते हैं कि इसे भूतों ने एक ही रात में बनाया था और सुबह होते ही काम अधूरा छोड़ कर भाग गए। क्या ये वाकई चमत्कार है या पुरानी कारीगरी का कोई जादू? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर की पूरी कहानी।
ड्राई स्टोन मेसनरी तकनीक से बनाया गया
ककनमठ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी सबसे खास बात इसकी बनावट है। इसे ड्राई स्टोन मेसनरी तकनीक से बनाया गया है। आप मंदिर के पत्थरों के बीच से आर-पार देख सकते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने लेगो ब्लॉक्स से खेल-खेल में इतना ऊंचा मंदिर बना दिया हो। लोग कहते हैं कि इस मंदिर के पत्थर हवा में झूलते महसूस होते हैं, लेकिन मंदिर अपनी जगह से हिलता तक नहीं है।
क्या सच में भूतों ने एक रात में बनाया था इसे? (Ghost Built Temple)
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस मंदिर को इंसानों ने नहीं, बल्कि भूतों और अदृश्य शक्तियों ने बनाया था। कहा जाता है कि इन शक्तियों ने एक ही रात में मंदिर का निर्माण शुरू किया। वे पत्थरों को जोड़ते चले गए, लेकिन जैसे ही सुबह की पहली किरण दिखी भूतों को काम छोड़कर भागना पड़ा। सुबह होने की वजह से वे मंदिर का ऊपरी हिस्सा और आसपास का काम पूरा नहीं कर पाए। यही वजह है कि आज भी यह मंदिर अधूरा सा दिखता है और इसके पत्थर बिखरे हुए नजर आते हैं।
एक गलती से रुक गया था निर्माण
मंदिर से जुड़ी एक और दिलचस्प कहानी है। कहते हैं कि कच्छपघात वंश के राजा कीर्तिराज इस मंदिर को बनवाना चाहते थे। भगवान शिव ने उनके सपने में आकर कहा कि मंदिर एक रात में बन जाएगा, लेकिन शर्त ये है कि कोई भी इंसान इसे बनते हुए नहीं देखेगा। राजा ने पूरे गांव में घोषणा करवा दी कि कोई भी घर से बाहर न निकले। लेकिन एक छोटे बच्चे की जिज्ञासा भारी पड़ गई। उसने खिड़की से चुपके से बाहर देख लिया। बस, जैसे ही उन शक्तियों को पता चला कि उन्हें देख लिया गया है, उन्होंने काम वहीं रोक दिया। मंदिर जैसा था, वैसा ही रह गया।
वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इसे 11वीं शताब्दी में राजा कीर्तिराज ने ही बनवाया था। यह एक बहुत बड़ा मंदिर था, जहां आसपास कई छोटे मंदिर थे। Archaeological Survey of India की मानें तो समय के साथ आए भीषण भूकंपों और बाहरी हमलों की वजह से आसपास के मंदिर ढह गए और मुख्य मंदिर का बाहरी ढांचा गिर गया। जो हिस्सा आज हम देखते हैं, वो इस मंदिर का गर्भगृह और मुख्य शिखर है। पत्थरों का सटीक संतुलन ही वो वजह है जिसकी वजह से बिना किसी जोड़ के भी ये आज तक खड़ा है।
आज भी अनसुलझी है इसकी कहानी
चाहे आप भूतों की कहानी पर यकीन करें या विज्ञान पर, ककनमठ मंदिर को देखकर आप दंग रह जाएंगे। यह मंदिर आज भी मुरैना के सुनसान इलाके में शान से खड़ा है। इसे देखने वाले लोग आज भी यही सोचते हैं कि बिना किसी आधुनिक मशीन के, उस जमाने में इतने भारी पत्थरों को इतनी ऊंचाई पर बिना किसी सपोर्ट के कैसे सेट किया गया होगा।


