MP News: मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब तक जहां शैक्षणिक एवं अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति डिजिटल ऐप के जरिए दर्ज की जाती थी। वहीं अब छात्रों की अटेंडेंस भी पूरी तरह डिजिटल होगी। खास बात यह है कि प्रोफेसर्स की तरह छात्रों की लोकेशन भी ऐप के माध्यम से ट्रेस की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे वास्तव में परिसर में मौजूद है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने एक कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा विभाग को ये निर्देश दिए थे। यह व्यवस्था प्रदेश के सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में लागू होगी।
75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी
नई व्यवस्था का सीधा असर छात्रवृत्ति (Scholarship) पर पड़ेगा। स्पष्ट निर्देश है कि जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग का तर्क है कि इससे कक्षाओं में नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और पढ़ाई का स्तर सुधरेगा।
9 लाख विद्यार्थियों की ऐप से लगेगी अटेंडेंस
शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। प्रदेश में 589 कॉलेजों में पढ़ने वाले 9 लाख से अधिक विद्यार्थी इसके दायरे में होंगे। छात्रों को ऐप डाउनलोड करना होगा, जिसके माध्यम से रोजाना कक्षा में उपस्थिति दर्ज होगी। ऐप जीपीएस आधारित होगा, जिससे यह पता चलेगा कि छात्र कॉलेज परिसर के भीतर है या नहीं।
बायोमेट्रिक व्यवस्था हो चुकी फेल
इससे पहले छात्रों के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू की गई थी। 100 छात्रों के बीच एक मशीन लगाई गई। कुछ दिन इस व्यवस्था पर काम भी हुआ। लेकिन अब यह मशीनें कचरे की तरह स्टोरी रूम में रखी हैं, या फिर बंद पड़ी है।
गुणवत्ता बढ़ाना है लक्ष्य – कमिश्नर
डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कर शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाना है। 75% उपस्थिति छात्रवृत्ति के लिए अनिवार्य होगी। तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पडेस्क बनाई जाएगी।- प्रबल सिपाहा, कमिश्नर उच्च शिक्षा (MP News)


