इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आनर किलिंग के आरोपी दंपत्ति की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी। जिन्होंने अपनी 15 वर्षीय गर्भवती बेटी और उसके 28 वर्षीय प्रेमी की हत्या कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि शादी हुए बिना बेटी गर्भवती होना एक औसत भारतीय के लिए ‘बुरा सपना’ (नाइटमेयर) है, जो अक्सर हिंसक प्रतिक्रियाओं को आमंत्रित करता है । आरोपित ने अपनी बेटी के प्रेम संबंधों के कारण उनकी हत्या कर दी, जो भारतीय समाज में एक आम बात है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा, अभियुक्तों ने हत्या के बाद शवों को छिपाने की कोशिश की। जमानत पर चल रही लड़की की मां को कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर सीजेएम शाहजहांपुर के समक्ष समर्पण का आदेश दिया है। आजीवन कारावास की मिली थी सजा अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता (संक्षेप में, ‘आईपीसी’) की धारा 302/34 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था और उनमें से प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। घटना की रिपोर्ट 20 अगस्त 2014 को थाना कलान में दर्ज कराई थी। कोर्ट ने पाया कि अभियुक्तों के पास अपराध करने का उद्देश्य था।


