‘हैलो, मैं ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब एजेंसी से बात कर रहा हूं। हम लोग नि:संतान महिलाओं को प्रेग्नेंट करने की नौकरी देते हैं। आपको बस महिला को प्रेग्नेंट करना होगा, इसके लिए आपको अच्छी रकम मिलेगी। आपको पहले छोटा अमाउंट देकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।’ नालंदा में इस तरह का ऑफर देकर ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। नालंदा पुलिस ने गुप्त सूचना पर कतरीसराय में छापेमारी कर एक नाबालिग समेत 6 लोगों को पकड़ा। नाबालिग को बाल सुधार गृह, जबकि अन्य 5 आरोपियों से पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से स्मार्टफोन्स जब्त किए गए हैं, जिसमें अलग-अलग तरीकों से साइबर ठगी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, इन स्मार्टफोन्स में यूज किए जा रहे फेसबुक और वॉट्सएप पर कई महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें और वीडियोज भी मिले हैं। पकड़े गए सभी 6 आरोपी कब से साइबर ठगी कर रहे थे? कितने लोगों से अब तक कितने रुपए की ठगी हुई है? इनका गिरोह कितने राज्यों में फैला हुआ है? आरोपियों के परिजन क्या कहते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
सबसे पहले जानिए किन तरीकों से आरोपी ठगी करते थे? नालंदा पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी 2 तरीकों से ऑनलाइन ठगी कर रहे थे। पहला तरीका: सस्ते ब्याज दरों पर लोन पास कराने का झांसा आरोपियों के पास से Poco, Realme, OPPO, Vivo, Tecno और Redmi कंपनी के स्मार्टफोन्स जब्त किए गए हैं। स्मार्टफोन्स में Dhani Finance Bank, Mudra Finance, AL-KHAIR Finance Bank और केरला लॉटरी के फर्जी विज्ञापन मिले हैं। इन मोबाइल में यूज किए जा रहे वॉट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्रोफाइल के डीपी में फर्जी विज्ञापनों की तस्वीरें लगी मिली हैं। साइबर ठग के आरोपी बेहद सस्ते ब्याज दरों पर तुरंत लोन पास कराने का लालच देकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठते थे। दूसरा तरीका: खूबसूरत लड़कियों को प्रेग्नेंट करने का झांसा पुलिस को 20 साल के नीतीश के फोन की जांच के दौरान फेसबुक और वॉट्सएप पर कई खूबसूरत महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो मिले। इन तस्वीरों पर आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज थे। एक विज्ञापन लिखा था, जिसमें दावा किया गया था कि जो भी पुरुष इन महिलाओं के साथ रहेगा और इन्हें ‘प्रेग्नेंट’ करेगा, उसे इनाम के तौर पर मोटी रकम दी जाएगी। इसके जरिए वे लोगों को ‘हनीट्रैप’ में फंसाते थे। वॉट्सएप चैट्स के अंदर पुलिस को कई लोगों के साथ की गई बातचीत और इससे संबंधित भ्रामक ‘ऑडियो’ रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसे पुलिस ने बतौर सबूत सुरक्षित रख लिया है।
खूबसूरत लड़कियों-महिलाओं की तस्वीर दिखाकर देते थे ऑफर सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि आरोपी अपने शिकार को खूबसूरत लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें भेजते थें। उनसे लड़की और महिलाओं को पसंद करने को कहते थे। जब शिकार महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरों को सिलेक्ट कर लेता था, तो रजिस्ट्रेशन के नाम पर इनसे पैसे वसूले जाते थे। सिक्योरिटी, सर्विस टैक्स के नाम पर दोबारा वसूली रजिस्ट्रेशन के नाम पर वसूली के बाद दोबारा आरोपी अपने शिकार को कॉल करते थे और उनसे सिक्योरिटी फीस, सर्विस टैक्स, GST के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपए तक मांगते थे। फेसबुक पर बनाया था ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ नाम का पेज शुरुआती जांच पड़ताल में ये भी पता चला है कि आरोपियों ने फेसबुक पर ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ नाम का पेज भी बनाया था, जिसमें व्हाट्सएप नंबर शेयर किया गया था। फेसबुक पेज पर कुछ वीडियोज भी पोस्ट किए गए थे, जिसमें एक महिला या लड़की दिखती थी। वो कहती थी कि मुझे मां बनना है, मुझे जो भी प्रेग्नेंट करेगा, उसे अच्छे पैसे मिलेंगे।
खेत में बैठकर साइबर फ्रॉड कर रहे थे आरोपी साइबर ठगी के आरोपी AC और हाई-टेक कमरों के बजाय गांव के सुनसान खेतों और चंवर (खलिहान) से बिहार के अलावा अन्य राज्यों के लोगों से ठगी कर रहे थे। दरअसल, 12 फरवरी 2026 को कतरीसराय थाना के ASI रूदल पासवान सिपाही रामप्रवेश पासवान और शशिकांत कुमार सिंह के साथ सुबह 10 बजे पेट्रोलिंग के लिए निकले थे। दोपहर करीब 2 बजकर 10 मिनट पर उन्हें गुप्त सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि कतरीसराय थाने से 4KM दूर पश्चिम दिशा में सुन्दरपुर और बरीठ गांव के सुनसान चंवर में कुछ युवक साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे हैं। जानकारी के बाद जैसे पुलिस खेत में पहुंची, देखा कि अलग-अलग झुंड बनाकर कुछ लोग मोबाइल लेकर बैठे हुए हैं। पुलिस को देखते ही सभी आरोपी भागने लगे। आरोपी खेतों की पगडंडियों से इधर-उधर भागने लगे, लेकिन पुलिस ने दौड़ाकर सभी को पकड़ लिया।
घर बाहर से देखने में साधारण, लेकिन अंदर से आलीशान मामला प्रकाश में आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम आरोपियों के गांव पहुंची। हमने सबसे पहले गांव के लोगों से बातचीत की। पता चला कि आरोपियों के घर बाहर से तो साधारण लगते हैं, लेकिन अंदर से काफी आलीशान हैं। सुख-सुविधा वाले सारे सामान मौजूद हैं। पकड़े गए आरोपियों में से किसी ने 10वीं तक पास नहीं की है। हमने आरोपियों के परिवार के लोगों से बात की। उन्होंने कहा कि जब हमारे बच्चे पढ़े लिखे नहीं हैं, तो साइबर ठगी का कोई मतलब ही नहीं बनता। उन्होंने अपने बच्चों को निर्दोष बताया। यादव टोला में रहने वाले अनिल कुमार के नाना विसनुदेव यादव ने कहा, ‘मेरा नाती पिछले दो साल से मेरे पास रहकर ट्रैक्टर चला रहा है। घटना वाले दिन वह पास के बगीचे में टहलने गया था, जहां से पुलिस ने उसे बेवजह उठा लिया। अनिल के माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं।’ पकड़े गए 16 साल के नाबालिग की मां ने कहा, ‘मेरा बेटा गाय-भैंसों का दूध निकालने का काम करता है। बगीचे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।’
ठगी के आरोपी की पत्नी बोली- पति ई-रिक्शा चलाते हैं सकुचीडीह के रहने वाले आरोपी नीतीश कुमार की पत्नी काजल ने कहा, ‘मेरे पति टोटो (ई-रिक्शा) चलाते हैं और कभी ऐसे किसी मामले में नहीं पड़े।’ मैरा गांव में रहने वाले 40 साल के प्रभात कुमार की भाभी ने कहा, ‘मेरे देवर गरीब किसान हैं। वो पुआल समेटने गए थे। किसी ने दुश्मनी निकालने या चंद पैसों के लालच में उन्हें मोबाइल थमाकर फंसा दिया है।’ गोवर्धन विगहा गांव में रहने वाले प्रीतम कुमार के घर वालों ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने नाम न छापने की रिक्वेस्ट पर बताया कि प्रीतम ठगी के धंधे में संलिप्त रहता था। वो गांव में कम और बाहर ज्यादा रहता था।
‘साइबर ठगों के आपराधिक रिकार्ड को खंगाला जा रहा है’ राजगीर के डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। इन ठगों की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों को ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि देश के अन्य राज्यों से भी इनके खिलाफ दर्ज शिकायतों को जोड़ा जा सके। साथ ही अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (Crime and Criminal Tracking Network Systems) के जरिए इनके पुराने आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है ताकि ये पता चल पाए कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। ‘हैलो, मैं ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब एजेंसी से बात कर रहा हूं। हम लोग नि:संतान महिलाओं को प्रेग्नेंट करने की नौकरी देते हैं। आपको बस महिला को प्रेग्नेंट करना होगा, इसके लिए आपको अच्छी रकम मिलेगी। आपको पहले छोटा अमाउंट देकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।’ नालंदा में इस तरह का ऑफर देकर ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। नालंदा पुलिस ने गुप्त सूचना पर कतरीसराय में छापेमारी कर एक नाबालिग समेत 6 लोगों को पकड़ा। नाबालिग को बाल सुधार गृह, जबकि अन्य 5 आरोपियों से पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से स्मार्टफोन्स जब्त किए गए हैं, जिसमें अलग-अलग तरीकों से साइबर ठगी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, इन स्मार्टफोन्स में यूज किए जा रहे फेसबुक और वॉट्सएप पर कई महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें और वीडियोज भी मिले हैं। पकड़े गए सभी 6 आरोपी कब से साइबर ठगी कर रहे थे? कितने लोगों से अब तक कितने रुपए की ठगी हुई है? इनका गिरोह कितने राज्यों में फैला हुआ है? आरोपियों के परिजन क्या कहते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
सबसे पहले जानिए किन तरीकों से आरोपी ठगी करते थे? नालंदा पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी 2 तरीकों से ऑनलाइन ठगी कर रहे थे। पहला तरीका: सस्ते ब्याज दरों पर लोन पास कराने का झांसा आरोपियों के पास से Poco, Realme, OPPO, Vivo, Tecno और Redmi कंपनी के स्मार्टफोन्स जब्त किए गए हैं। स्मार्टफोन्स में Dhani Finance Bank, Mudra Finance, AL-KHAIR Finance Bank और केरला लॉटरी के फर्जी विज्ञापन मिले हैं। इन मोबाइल में यूज किए जा रहे वॉट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्रोफाइल के डीपी में फर्जी विज्ञापनों की तस्वीरें लगी मिली हैं। साइबर ठग के आरोपी बेहद सस्ते ब्याज दरों पर तुरंत लोन पास कराने का लालच देकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठते थे। दूसरा तरीका: खूबसूरत लड़कियों को प्रेग्नेंट करने का झांसा पुलिस को 20 साल के नीतीश के फोन की जांच के दौरान फेसबुक और वॉट्सएप पर कई खूबसूरत महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो मिले। इन तस्वीरों पर आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज थे। एक विज्ञापन लिखा था, जिसमें दावा किया गया था कि जो भी पुरुष इन महिलाओं के साथ रहेगा और इन्हें ‘प्रेग्नेंट’ करेगा, उसे इनाम के तौर पर मोटी रकम दी जाएगी। इसके जरिए वे लोगों को ‘हनीट्रैप’ में फंसाते थे। वॉट्सएप चैट्स के अंदर पुलिस को कई लोगों के साथ की गई बातचीत और इससे संबंधित भ्रामक ‘ऑडियो’ रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसे पुलिस ने बतौर सबूत सुरक्षित रख लिया है।
खूबसूरत लड़कियों-महिलाओं की तस्वीर दिखाकर देते थे ऑफर सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि आरोपी अपने शिकार को खूबसूरत लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें भेजते थें। उनसे लड़की और महिलाओं को पसंद करने को कहते थे। जब शिकार महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरों को सिलेक्ट कर लेता था, तो रजिस्ट्रेशन के नाम पर इनसे पैसे वसूले जाते थे। सिक्योरिटी, सर्विस टैक्स के नाम पर दोबारा वसूली रजिस्ट्रेशन के नाम पर वसूली के बाद दोबारा आरोपी अपने शिकार को कॉल करते थे और उनसे सिक्योरिटी फीस, सर्विस टैक्स, GST के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपए तक मांगते थे। फेसबुक पर बनाया था ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ नाम का पेज शुरुआती जांच पड़ताल में ये भी पता चला है कि आरोपियों ने फेसबुक पर ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ नाम का पेज भी बनाया था, जिसमें व्हाट्सएप नंबर शेयर किया गया था। फेसबुक पेज पर कुछ वीडियोज भी पोस्ट किए गए थे, जिसमें एक महिला या लड़की दिखती थी। वो कहती थी कि मुझे मां बनना है, मुझे जो भी प्रेग्नेंट करेगा, उसे अच्छे पैसे मिलेंगे।
खेत में बैठकर साइबर फ्रॉड कर रहे थे आरोपी साइबर ठगी के आरोपी AC और हाई-टेक कमरों के बजाय गांव के सुनसान खेतों और चंवर (खलिहान) से बिहार के अलावा अन्य राज्यों के लोगों से ठगी कर रहे थे। दरअसल, 12 फरवरी 2026 को कतरीसराय थाना के ASI रूदल पासवान सिपाही रामप्रवेश पासवान और शशिकांत कुमार सिंह के साथ सुबह 10 बजे पेट्रोलिंग के लिए निकले थे। दोपहर करीब 2 बजकर 10 मिनट पर उन्हें गुप्त सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि कतरीसराय थाने से 4KM दूर पश्चिम दिशा में सुन्दरपुर और बरीठ गांव के सुनसान चंवर में कुछ युवक साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे हैं। जानकारी के बाद जैसे पुलिस खेत में पहुंची, देखा कि अलग-अलग झुंड बनाकर कुछ लोग मोबाइल लेकर बैठे हुए हैं। पुलिस को देखते ही सभी आरोपी भागने लगे। आरोपी खेतों की पगडंडियों से इधर-उधर भागने लगे, लेकिन पुलिस ने दौड़ाकर सभी को पकड़ लिया।
घर बाहर से देखने में साधारण, लेकिन अंदर से आलीशान मामला प्रकाश में आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम आरोपियों के गांव पहुंची। हमने सबसे पहले गांव के लोगों से बातचीत की। पता चला कि आरोपियों के घर बाहर से तो साधारण लगते हैं, लेकिन अंदर से काफी आलीशान हैं। सुख-सुविधा वाले सारे सामान मौजूद हैं। पकड़े गए आरोपियों में से किसी ने 10वीं तक पास नहीं की है। हमने आरोपियों के परिवार के लोगों से बात की। उन्होंने कहा कि जब हमारे बच्चे पढ़े लिखे नहीं हैं, तो साइबर ठगी का कोई मतलब ही नहीं बनता। उन्होंने अपने बच्चों को निर्दोष बताया। यादव टोला में रहने वाले अनिल कुमार के नाना विसनुदेव यादव ने कहा, ‘मेरा नाती पिछले दो साल से मेरे पास रहकर ट्रैक्टर चला रहा है। घटना वाले दिन वह पास के बगीचे में टहलने गया था, जहां से पुलिस ने उसे बेवजह उठा लिया। अनिल के माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं।’ पकड़े गए 16 साल के नाबालिग की मां ने कहा, ‘मेरा बेटा गाय-भैंसों का दूध निकालने का काम करता है। बगीचे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।’
ठगी के आरोपी की पत्नी बोली- पति ई-रिक्शा चलाते हैं सकुचीडीह के रहने वाले आरोपी नीतीश कुमार की पत्नी काजल ने कहा, ‘मेरे पति टोटो (ई-रिक्शा) चलाते हैं और कभी ऐसे किसी मामले में नहीं पड़े।’ मैरा गांव में रहने वाले 40 साल के प्रभात कुमार की भाभी ने कहा, ‘मेरे देवर गरीब किसान हैं। वो पुआल समेटने गए थे। किसी ने दुश्मनी निकालने या चंद पैसों के लालच में उन्हें मोबाइल थमाकर फंसा दिया है।’ गोवर्धन विगहा गांव में रहने वाले प्रीतम कुमार के घर वालों ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने नाम न छापने की रिक्वेस्ट पर बताया कि प्रीतम ठगी के धंधे में संलिप्त रहता था। वो गांव में कम और बाहर ज्यादा रहता था।
‘साइबर ठगों के आपराधिक रिकार्ड को खंगाला जा रहा है’ राजगीर के डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। इन ठगों की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों को ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि देश के अन्य राज्यों से भी इनके खिलाफ दर्ज शिकायतों को जोड़ा जा सके। साथ ही अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (Crime and Criminal Tracking Network Systems) के जरिए इनके पुराने आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है ताकि ये पता चल पाए कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।


