गया जी डैम का पानी आज रात छोड़ा जाएगा:आसपास के लोगों को घाटों से दूर रहने की सख्त हिदायत, डैम की सफाई कराई जाएगी

गया जी डैम का पानी आज रात छोड़ा जाएगा:आसपास के लोगों को घाटों से दूर रहने की सख्त हिदायत, डैम की सफाई कराई जाएगी

गया में विष्णुपद स्थित फल्गु नदी पर बने रबर डैम को लेकर जिला प्रशासन ने अहम अलर्ट जारी किया है। 3 अप्रैल 2026 की रात डैम का पानी डाउनस्ट्रीम (उत्तर दिशा) की ओर छोड़ा जाएगा। इसको लेकर डीएम शशांक शुभंकर ने लोगों से सतर्क रहने और घाटों से दूर रहने की अपील की है। क्यों लिया गया पानी छोड़ने का फैसला
दरअसल, डैम के अपस्ट्रीम में जमा पानी का इस्तेमाल पूरे साल पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों में होता है। लेकिन बरसाती नदी होने के कारण बारिश खत्म होते ही पानी का स्तर तेजी से घटने लगता है। मार्च के बाद स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं द्वारा प्रवाहित पिंड और पूजन सामग्री डैम में जमा हो जाती है। इससे देवघाट और आसपास के इलाकों में दुर्गंध फैलने लगती है और पानी उपयोग के लायक नहीं रह जाता। सफाई और सिस्टम सुधार के लिए कदम
जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर निर्णय लिया है कि डैम के दक्षिण अपस्ट्रीम में बचा पानी डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाए, ताकि डैम की सफाई हो सके और आगामी मानसून से पहले व्यवस्था दुरुस्त की जा सके। इन इलाकों से दूर रहें
प्रशासन ने विशेष तौर पर चेतावनी दी है कि पानी छोड़े जाने के दौरान कोई भी व्यक्ति नदी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में न जाए। खासकर संगत घाट, ब्राह्मणी घाट, नदी का तल और किनारे सहित नदी किनारे रहने वाले अस्थायी लोगों को तुरंत वहां से हटने को कहा गया है। लापरवाही पड़ सकती है भारी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। थोड़ी सी भी लापरवाही जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है। लोगों से अपील की गई है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और निर्धारित समय तक घाटों से पूरी तरह दूर रहें। गया में विष्णुपद स्थित फल्गु नदी पर बने रबर डैम को लेकर जिला प्रशासन ने अहम अलर्ट जारी किया है। 3 अप्रैल 2026 की रात डैम का पानी डाउनस्ट्रीम (उत्तर दिशा) की ओर छोड़ा जाएगा। इसको लेकर डीएम शशांक शुभंकर ने लोगों से सतर्क रहने और घाटों से दूर रहने की अपील की है। क्यों लिया गया पानी छोड़ने का फैसला
दरअसल, डैम के अपस्ट्रीम में जमा पानी का इस्तेमाल पूरे साल पिंडदान और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों में होता है। लेकिन बरसाती नदी होने के कारण बारिश खत्म होते ही पानी का स्तर तेजी से घटने लगता है। मार्च के बाद स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं द्वारा प्रवाहित पिंड और पूजन सामग्री डैम में जमा हो जाती है। इससे देवघाट और आसपास के इलाकों में दुर्गंध फैलने लगती है और पानी उपयोग के लायक नहीं रह जाता। सफाई और सिस्टम सुधार के लिए कदम
जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर निर्णय लिया है कि डैम के दक्षिण अपस्ट्रीम में बचा पानी डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाए, ताकि डैम की सफाई हो सके और आगामी मानसून से पहले व्यवस्था दुरुस्त की जा सके। इन इलाकों से दूर रहें
प्रशासन ने विशेष तौर पर चेतावनी दी है कि पानी छोड़े जाने के दौरान कोई भी व्यक्ति नदी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में न जाए। खासकर संगत घाट, ब्राह्मणी घाट, नदी का तल और किनारे सहित नदी किनारे रहने वाले अस्थायी लोगों को तुरंत वहां से हटने को कहा गया है। लापरवाही पड़ सकती है भारी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। थोड़ी सी भी लापरवाही जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है। लोगों से अपील की गई है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और निर्धारित समय तक घाटों से पूरी तरह दूर रहें।  

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