शादी में बेटी को दिया ट्रैक्टर, बारातियों को बांटे हेलमेट:किसान पिता बोले- हर घर में बर्तन मौजूद, इसलिए उपयोगी गिफ्ट दिया

शादी में बेटी को दिया ट्रैक्टर, बारातियों को बांटे हेलमेट:किसान पिता बोले- हर घर में बर्तन मौजूद, इसलिए उपयोगी गिफ्ट दिया

नागौर में एक किसान ने बेटी की शादी में अनोखी पहल की है। पिता ने पारंपरिक बर्तनों और घरेलू सामान की जगह बेटी को खेती के काम आने वाला ट्रैक्टर भेंट किया। शादी में आए बारातियों के साथ- साथ वेटर्स को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हेलमेट भेंट किए। रियां बड़ी क्षेत्र के किसान हनुमान राम माली की बेटी सरोज की शादी 9 मार्च की रात्रि को अमरपुरा(पाली) निवासी किसान ओमप्रकाश के बेटे रविंद्र से हुई। दूल्हा रविंद्र भी पिता के खेती के काम में हाथ बंटाता है। हनुमान राम माली का कहना है- आजकल हर घर में बर्तन, फ्रिज, टीवी और कूलर जैसे सामान पहले से ही मौजूद होते हैं। ऐसे में शादी में अनावश्यक खर्च करने के बजाय ऐसा सामान देना बेहतर है, जो जीवन और काम दोनों में उपयोगी हो। इसी सोच के साथ उन्होंने बेटी को ट्रैक्टर देने का फैसला लिया। पहले देखिए- शादी के समारोह की 2 तस्वीरें शर्त रखी कि शादी में हेलमेट पहनकर ही आए
माली ने बारातियों के सामने यह शर्त भी रखी कि दुपहिया वाहन से आने वाले सभी बाराती हेलमेट पहनकर आएं। शादी समारोह में उन्होंने बारातियों को हेलमेट भेंट करते हुए अपील की कि वे रोजाना दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग करें और अपने परिवार व समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें। 111 बारातियों के साथ साथ वेटर्स को भी बांटे हेलमेट
दुल्हन के चाचा विशनाराम ने बताया कि बारात ब्यावर के अमरपुरा से आई थी, जो रियां बड़ी से 25 किमी दूर है। 111 बरातियों के साथ साथ शादी में लगे वैटर्स को मिलाकर 151 हेलमेट बांटे गए। दुल्हन के भाई हंसराज सामरिया, लोकेश माली कहना था कि सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है क्योंकि वे हेलमेट नहीं पहनते। उन्होंने जोर दिया कि यदि शादी जैसे सामाजिक अवसरों पर भी इस तरह के संदेश दिए जाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। दुल्हन सरोज वर्तमान में एमएससी एमएड है, जबकि दूल्हा रविंद्र बीएससी बीएड है और वर्तमान में अपने पिता की खेती का काम संभाल रहा है। दूल्हे के पिता ओम प्रकाश खेती से जुड़े हुए हैं। दुल्हन के पिता हनुमान राम सामरिया अपने क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से शकरकंद, गन्ना और पपीता की खेती के लिए पहचाने जाते हैं। इस मौके पर कैलाश राम, सुरेश, महेंद्र, विशनाराम सैनी, बाबूलाल माली, रामनिवास माली, महावीर सहित सैकड़ों माली समाज के लोग शामिल रहे।

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