एसओएस (SOS) चिल्ड्रन विलेज की ओर से महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के उत्थान और बेहतरी के लिए चलाए जा रहे अभियानों की कड़ी में आज विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बगवाड़ा गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को वॉश अभियान के तहत स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित शौचालय और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार की सेहत की धुरी महिलाएं होती हैं। SOS चिल्ड्रन विलेज के विजय लिम्बु ने कहा कि हमारा लक्ष्य बगवाड़ा की हर महिला को स्वच्छता के मानकों से अवगत कराना है ताकि वे एक बीमारी-मुक्त जीवन जी सकें। सुदीप्तो पाल ने जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के साथ संसाधनों की उपलब्धता भी जरूरी है, इसीलिए स्वच्छता किट का वितरण किया जा रहा है। जिससे महिलाएं व्यवहारिक रूप से स्वच्छता को अपना सकें। प्रशिक्षण को सफल बनाने में पिरामल फाउंडेशन के दीपक मिश्रा और आरती शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वच्छता केवल बाहरी सफाई नहीं उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य और आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है। शुभम पाठक ने कीटाणुमुक्त वातावरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। वहीं, माया कौशल्या फाउंडेशन के सचिव रौशन कुमार ने कहा कि जब महिलाएं स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगी, तभी गांव एक आदर्श और स्वस्थ गांव बनेगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी सहभागी 100 महिलाओं के बीच स्वच्छता किट का वितरण किया गया। इस किट में नहाने का साबुन, कपड़े धोने का साबुन, बर्तन धोने का साबुन और टॉयलेट क्लीनर (हार्पिक) जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल थी। आयोजकों ने बताया कि इस किट का उद्देश्य महिलाओं को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करना और उन्हें जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है। एसओएस (SOS) चिल्ड्रन विलेज की ओर से महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के उत्थान और बेहतरी के लिए चलाए जा रहे अभियानों की कड़ी में आज विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बगवाड़ा गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को वॉश अभियान के तहत स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित शौचालय और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार की सेहत की धुरी महिलाएं होती हैं। SOS चिल्ड्रन विलेज के विजय लिम्बु ने कहा कि हमारा लक्ष्य बगवाड़ा की हर महिला को स्वच्छता के मानकों से अवगत कराना है ताकि वे एक बीमारी-मुक्त जीवन जी सकें। सुदीप्तो पाल ने जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के साथ संसाधनों की उपलब्धता भी जरूरी है, इसीलिए स्वच्छता किट का वितरण किया जा रहा है। जिससे महिलाएं व्यवहारिक रूप से स्वच्छता को अपना सकें। प्रशिक्षण को सफल बनाने में पिरामल फाउंडेशन के दीपक मिश्रा और आरती शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वच्छता केवल बाहरी सफाई नहीं उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य और आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है। शुभम पाठक ने कीटाणुमुक्त वातावरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। वहीं, माया कौशल्या फाउंडेशन के सचिव रौशन कुमार ने कहा कि जब महिलाएं स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगी, तभी गांव एक आदर्श और स्वस्थ गांव बनेगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी सहभागी 100 महिलाओं के बीच स्वच्छता किट का वितरण किया गया। इस किट में नहाने का साबुन, कपड़े धोने का साबुन, बर्तन धोने का साबुन और टॉयलेट क्लीनर (हार्पिक) जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल थी। आयोजकों ने बताया कि इस किट का उद्देश्य महिलाओं को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करना और उन्हें जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है।


