पहचान के गलत इस्तेमाल पर भड़के Gautam Gambhir, Delhi High Court में ठोका 2.5 करोड़ का मुकदमा

पहचान के गलत इस्तेमाल पर भड़के Gautam Gambhir, Delhi High Court में ठोका 2.5 करोड़ का मुकदमा
डिजिटल दौर में तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कानूनी कदम उठाया। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर अपनी पहचान के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।
बता दें कि गंभीर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी छवि, आवाज और नाम का इस्तेमाल कृत्रिम तकनीकों के जरिए गलत तरीके से किया जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस मामले में कई सोशल मीडिया खातों, ऑनलाइन मंचों और खरीद-बिक्री से जुड़े मंचों को प्रतिवादी बनाया गया है।
गौरतलब है कि याचिका में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे मंचों के साथ-साथ मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स कॉर्प और गूगल जैसे डिजिटल माध्यमों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग को भी औपचारिक पक्षकार बनाया गया है, ताकि अदालत के आदेशों को लागू कराया जा सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार गंभीर ने अदालत से तत्काल अंतरिम राहत की मांग करते हुए कहा है कि ऐसे सभी आपत्तिजनक वीडियो और सामग्री को तुरंत हटाया जाए और उनके प्रसार पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने लगभग ढाई करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025 के अंत से ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां चेहरे की अदला-बदली और आवाज की नकल जैसी तकनीकों का उपयोग कर फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं। बता दें कि कुछ वीडियो में उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने कभी नहीं दिए, जिससे लोगों में भ्रम फैला और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
गौरतलब है कि गंभीर ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति के व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जिसमें उनके नाम से उत्पाद बेचने जैसे मामले भी शामिल हैं। उन्होंने इसे सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर गरिमा और कानूनी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह मामला कॉपीराइट कानून, ट्रेडमार्क कानून और वाणिज्यिक अदालत से जुड़े प्रावधानों के तहत दायर किया गया है। साथ ही, अदालतों के पहले के फैसलों का हवाला भी दिया गया है, जिनमें व्यक्ति की पहचान और प्रचार अधिकारों को कानूनी संरक्षण दिया गया है।
यह मामला आने वाले दिनों में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है, जहां अदालत अंतरिम राहत पर विचार करेगी।

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