Gautam Adani Chief Security Officer: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार और अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी की सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है। उन्हें केंद्र सरकार की ओर से ‘जेड’ (Z) कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है। लेकिन उनकी निजी सुरक्षा और अदाणी ग्रुप की संपत्तियों की सुरक्षा का जिम्मा एक ऐसे जांबाज के पास है, जिसने भारतीय सेना की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूनिट में अपनी सेवाएं दी हैं। हम बात कर रहे हैं, रिटायर्ड मेजर सिद्धार्थ राठौड़ की, जो वर्तमान में अदाणी ग्रुप के मुख्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
Major Siddharth Rathore Profile: राजस्थान से है खास कनेक्शन
मेजर सिद्धार्थ राठौड़ मूल रूप से मरूभूमि राजस्थान के रहने वाले हैं। उन्हें देश सेवा और सेना में जाने की प्रेरणा अपने चाचा ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत से मिली। सिद्धार्थ ने ना केवल सेना में प्रवेश किया, बल्कि पैराशूट रेजिमेंट की 12वीं बटालियन (पैरा स्पेशल फोर्सेस) में सीधे कमीशन पाने वाले पहले ऑफिसर बनकर इतिहास रचा। करीब एक दशक तक सेना में रहते हुए उन्होंने क्लोज-कॉम्बैट, मॉडर्न वॉर टेक्निक्स और जोखिम भरे ऑपरेशंस को लीड करने में महारत हासिल की।
Major Siddharth Rathore Biography: सेना से कॉर्पोरेट तक का सफर
भारतीय सेना से रिटायरमेंट होने के बाद मेजर राठौड़ ने कॉर्पोरेट जगत की ओर रुख किया। वर्तमान में वे अहमदाबाद में मौजूद अदाणी ग्रुप के सिक्योरिटी डिपार्टमेंट में डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) के पद पर तैनात हैं। उनका विशेष काम समूह की खास संपत्तियों की रक्षा करना और चेयरमैन गौतम अदाणी की सुरक्षा तय करना है। वे अदाणी ग्रुप को देश का एक जरूरी स्ट्रेजिक पिलर मानते हैं और उसी समर्पण भाव के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
Gautam Adani Security Cost: सुरक्षा पर होता है इतना खर्चा
गौतम अदाणी को भारत सरकार ने सीआरपीएफ (CRPF) कमांडो की ‘जेड’ कैटेगरी की वीआईपी सुरक्षा मुहैया करवाई हुई है। इस सुरक्षा घेरे का खर्च लगभग 15 से 20 लाख रुपये प्रति माह आता है। फोर्ब्स के मुताबिक, अदाणी की कुल नेटवर्थ लगभग 59.1 बिलियन डॉलर (करीब 5.43 लाख करोड़ रुपये) है और वे दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल हैं। अदाणी भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट डायरेक्टर होने के साथ-साथ मुंद्रा पोर्ट को भी ऑपरेट करते हैं।
मेजर राठौड़ न केवल अपनी ड्यूटी के लिए सजग हैं, बल्कि वो आज भी अपने भीतर के सैनिक को जीवित रखे हुए हैं। वे मानसिक मजबूती और सीमाओं को परखने के लिए आज भी स्काईडाइविंग जैसे शौक रखते हैं। स्पेशल फोर्सेस में रहने के कारण वे कठिन से कठिन हालातों में भी शांत रहकर सटीक फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं।


