गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड स्थित दुर्ग मटिहानिया पंचायत के रूप छाप गांव निवासी गौरव ने यूपीएससी परीक्षा में 377वीं रैंक हासिल कर आईएएस का पद प्राप्त किया है। वे शिवजी कुशवाहा और मंजू देवी के पुत्र हैं। उनकी यह सफलता दृढ़ धैर्य, पारिवारिक सहयोग और विपरीत परिस्थितियों से जूझने का एक उदाहरण है। गौरव को अपने पहले यूपीएससी प्रयास में असफलता का सामना करना पड़ा था। एक होनहार छात्र होने के बावजूद, इस विफलता से उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा और वे एंजाइटी के शिकार हो गए। दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की इस कठिन समय में उनकी मां, जो पेशे से एक शिक्षिका हैं, उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनीं। उन्होंने गौरव का हौसला बढ़ाया और उन्हें समझाया कि असफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। मां के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर गौरव ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की और गोपालगंज का नाम रोशन किया। गौरव की शिक्षा के प्रति उनके परिवार का समर्पण भी उल्लेखनीय रहा। उनकी मां ने बताया कि स्कूल जाने का रास्ता बेहद जर्जर था, खासकर बारिश में वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता था। गौरव की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए उनके पिता, जो एक व्यवसायी हैं, ने स्वयं पहल कर उस रास्ते की मरम्मत कराई। बधाई देने उनके घर पहुंचने लगे गौरव की सफलता की खबर मिलते ही पूरे गोपालगंज और उनके गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। आस-पास के लोग उन्हें बधाई देने उनके घर पहुंचने लगे। इस अवसर पर उन्हें फूल-मालाएं पहनाई गईं और मिठाइयां बांटी गईं। गौरव की प्रारंभिक शिक्षा पांचवीं तक गांव के ही सरकारी विद्यालय में हुई थी। दसवीं की तक की पढ़ाई सिवान के प्राइवेट विद्यालय में हु। जबकि इंटर की पढ़ाई पटना से पूरी की बीए की पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी से पूरी की जबकि जेएनयू से एमए अर्थशास्त्र की पढ़ाई पूरी की। ”मैं नौ घंटा पढ़ाई करता था” इस दौरान उन्होंने लगार्ड और रघुरामराजन के प्रेरित हुए और यूपीएससी की तैयारी शुरू की उन्होंने कहा कि मैं नौ घंटा पढ़ाई करता था बीच बीच में ब्रेक लेता था। उन्होंने सोशल मीडिया इंस्टा पर एक्टिव रहने की बात कह साथ ही उन्होंने कहा कि सेल्फ स्टडी काफी कारगर रही और सेल्फ स्टडी काफी करता था। गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड स्थित दुर्ग मटिहानिया पंचायत के रूप छाप गांव निवासी गौरव ने यूपीएससी परीक्षा में 377वीं रैंक हासिल कर आईएएस का पद प्राप्त किया है। वे शिवजी कुशवाहा और मंजू देवी के पुत्र हैं। उनकी यह सफलता दृढ़ धैर्य, पारिवारिक सहयोग और विपरीत परिस्थितियों से जूझने का एक उदाहरण है। गौरव को अपने पहले यूपीएससी प्रयास में असफलता का सामना करना पड़ा था। एक होनहार छात्र होने के बावजूद, इस विफलता से उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा और वे एंजाइटी के शिकार हो गए। दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की इस कठिन समय में उनकी मां, जो पेशे से एक शिक्षिका हैं, उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनीं। उन्होंने गौरव का हौसला बढ़ाया और उन्हें समझाया कि असफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। मां के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर गौरव ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की और गोपालगंज का नाम रोशन किया। गौरव की शिक्षा के प्रति उनके परिवार का समर्पण भी उल्लेखनीय रहा। उनकी मां ने बताया कि स्कूल जाने का रास्ता बेहद जर्जर था, खासकर बारिश में वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता था। गौरव की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए उनके पिता, जो एक व्यवसायी हैं, ने स्वयं पहल कर उस रास्ते की मरम्मत कराई। बधाई देने उनके घर पहुंचने लगे गौरव की सफलता की खबर मिलते ही पूरे गोपालगंज और उनके गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। आस-पास के लोग उन्हें बधाई देने उनके घर पहुंचने लगे। इस अवसर पर उन्हें फूल-मालाएं पहनाई गईं और मिठाइयां बांटी गईं। गौरव की प्रारंभिक शिक्षा पांचवीं तक गांव के ही सरकारी विद्यालय में हुई थी। दसवीं की तक की पढ़ाई सिवान के प्राइवेट विद्यालय में हु। जबकि इंटर की पढ़ाई पटना से पूरी की बीए की पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी से पूरी की जबकि जेएनयू से एमए अर्थशास्त्र की पढ़ाई पूरी की। ”मैं नौ घंटा पढ़ाई करता था” इस दौरान उन्होंने लगार्ड और रघुरामराजन के प्रेरित हुए और यूपीएससी की तैयारी शुरू की उन्होंने कहा कि मैं नौ घंटा पढ़ाई करता था बीच बीच में ब्रेक लेता था। उन्होंने सोशल मीडिया इंस्टा पर एक्टिव रहने की बात कह साथ ही उन्होंने कहा कि सेल्फ स्टडी काफी कारगर रही और सेल्फ स्टडी काफी करता था।


