‘केंद्र सरकार की गलत विदेश नीति से गैस किल्लत’:दिल्ली में 24 मार्च को CPI(M) की रैली, 1 लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा

‘केंद्र सरकार की गलत विदेश नीति से गैस किल्लत’:दिल्ली में 24 मार्च को CPI(M) की रैली, 1 लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा

सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य अशोक ढ़ावले ने कहा है कि भारत सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से असफल हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कारिंदा बनकर रह गए हैं। असफल विदेश नीति के कारण देश भर में गैस के लिए हाहाकार मचा है। स्थिति यही रही तो डीजल-पेट्रोल के लिए भी संकट होगा। लोकतांत्रिक-तानाशाही फैसलों से समाज के हर किसी की जिंदगी बर्बादी की दहलीज पर पहुंच गई है। इसको लेकर सीपीआई (एम) की ओर से 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें एक लाख से भी अधिक लोग जुटेंगे और जोरदार तरीके से अपनी बात रखेंगे। आज बेगूसराय में अशोक ढ़ावले लेने कहा है कि मजदूर, किसान, गरीब, दलित, महिला, अल्पसंख्यक सबके जीने का अधिकार समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। आजादी से हासिल कौमी एकता को सांप्रदायिकता की आग में झोंक कर सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डाल रही है। मनरेगा, श्रम संहिता, बीज और बिजली विधेयक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, यूजीसी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर 24 मार्च को रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली की सफलता के लिए छह जन आक्रोश जत्था निकाला है जो सभी जिलों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। इस रैली में बिहार से 20 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे। ऐसे ही युद्ध जारी रहा तो पेट्रोल-डीजल पर भी संकट उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों में भारत की जनता की स्थिति बदतर नहीं हुई थी, उतनी आज की तारीख में हो गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने जो जंग छेड़ा है, उसका कोई कारण नहीं है। इस युद्ध से भारत के ऊपर भी प्रभाव पड़ने लगा है। रसोई गैस का दाम केंद्र सरकार ने बढ़ाया। उसके बाद अब पूरे देश में गैस का अभाव हो गया है। कालाबाजारी में 2000 से 3500 तक में सिलेंडर बिक रहा है। यह युद्ध ऐसे ही चला रहा तो डीजल-पेट्रोल के भी दाम बढ़ेंगे। भारत के प्रधानमंत्री अगर युद्ध रोकने में स्पष्ट भूमिका लेते तो कुछ हद तक उसका परिणाम हो सकता था, लेकिन जो आक्रमण कर रहा, उसी को भारत सरकार ने समर्थन दिया है। युद्ध शुरू होने से 2 दिन पहले नरेंद्र मोदी इजरायल गए, जिस इजराइल ने 2 साल में 75 हजार लोगों की हत्या की है। ऐसे देश में जाकर नेतन्याहू के गले मिले, इसे सब ने देखा। ईरान लंबे समय से हमारा मित्र देश है, तेल और गैस हमें सस्ते में दे रहा था। भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भी ईरान ने मुसलमान देश रहते हुए भारत को समर्थन दिया था।

इजराइल से मिलकर ईरान से संबंध खराब कर लिया अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने गैस पाइपलाइन के लिए कुछ नहीं किया। अभी इजराइल से मिलकर ईरान से संबंध खराब कर लिया, इससे जनता का नुकसान हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के चलते नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किया है। इस समझौता से भारत के किसान और मजदूर परेशान होंगे, कारखाने बंद हो जाएंगे। जिससे बिहार भी प्रभावित होगा, बिहार से मक्का किसान, आलू के किसान, धान के किसान, दूसरे राज्यों के कपास के किसान, सोयाबीन के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे। यह व्यापार समझौता देश को नुकसान करने वाला है, देश की आजादी और संप्रभुता को खत्म करने वाला है। इसका भी हम लगातार प्रतिरोध कर रहे हैं।
मोदी सरकार ने गलत कदम उठाए बड़े-बड़े कॉर्पोरेट के कहने पर मोदी सरकार ने गलत कदम उठाए हैं। मजदूरों के खिलाफ लेबर कोड लागू किया गया है। यह लेबर कोड करोड़ों मजदूर को बड़े-बड़े मालिकों का गुलाम बनाएगा। खेतिहर मजदूर का रोजगार खत्म करने के लिए मनरेगा कानून संसद में रद्द करके राम जी नाम का कानून लाया गया। जिस कानून से साल में 10-15 दिन का भी काम ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को नहीं मिलेगा। इन सबके खिलाफ बहुत बड़ी रैली दिल्ली में होगी, शक्ति प्रदर्शन होगा। संसद चालू होगा तो संसद के सामने भी हम सवाल करेंगे। बीजेपी का काम है लोगों को बांटो और राज करो। जो काम ब्रिटिश सरकार कर रही थी वही नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और अमित शाह की सरकार कर रही है। इसका भी हम लगातार विरोध करते रहेंगे। प्रेसवार्ता में राज्य सचिव ललन चौधरी, जिला सचिव रत्नेश झा, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह और दयानिधि चौधरी भी उपस्थित थे। सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य अशोक ढ़ावले ने कहा है कि भारत सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से असफल हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कारिंदा बनकर रह गए हैं। असफल विदेश नीति के कारण देश भर में गैस के लिए हाहाकार मचा है। स्थिति यही रही तो डीजल-पेट्रोल के लिए भी संकट होगा। लोकतांत्रिक-तानाशाही फैसलों से समाज के हर किसी की जिंदगी बर्बादी की दहलीज पर पहुंच गई है। इसको लेकर सीपीआई (एम) की ओर से 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें एक लाख से भी अधिक लोग जुटेंगे और जोरदार तरीके से अपनी बात रखेंगे। आज बेगूसराय में अशोक ढ़ावले लेने कहा है कि मजदूर, किसान, गरीब, दलित, महिला, अल्पसंख्यक सबके जीने का अधिकार समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। आजादी से हासिल कौमी एकता को सांप्रदायिकता की आग में झोंक कर सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डाल रही है। मनरेगा, श्रम संहिता, बीज और बिजली विधेयक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, यूजीसी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर 24 मार्च को रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली की सफलता के लिए छह जन आक्रोश जत्था निकाला है जो सभी जिलों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। इस रैली में बिहार से 20 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे। ऐसे ही युद्ध जारी रहा तो पेट्रोल-डीजल पर भी संकट उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों में भारत की जनता की स्थिति बदतर नहीं हुई थी, उतनी आज की तारीख में हो गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने जो जंग छेड़ा है, उसका कोई कारण नहीं है। इस युद्ध से भारत के ऊपर भी प्रभाव पड़ने लगा है। रसोई गैस का दाम केंद्र सरकार ने बढ़ाया। उसके बाद अब पूरे देश में गैस का अभाव हो गया है। कालाबाजारी में 2000 से 3500 तक में सिलेंडर बिक रहा है। यह युद्ध ऐसे ही चला रहा तो डीजल-पेट्रोल के भी दाम बढ़ेंगे। भारत के प्रधानमंत्री अगर युद्ध रोकने में स्पष्ट भूमिका लेते तो कुछ हद तक उसका परिणाम हो सकता था, लेकिन जो आक्रमण कर रहा, उसी को भारत सरकार ने समर्थन दिया है। युद्ध शुरू होने से 2 दिन पहले नरेंद्र मोदी इजरायल गए, जिस इजराइल ने 2 साल में 75 हजार लोगों की हत्या की है। ऐसे देश में जाकर नेतन्याहू के गले मिले, इसे सब ने देखा। ईरान लंबे समय से हमारा मित्र देश है, तेल और गैस हमें सस्ते में दे रहा था। भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भी ईरान ने मुसलमान देश रहते हुए भारत को समर्थन दिया था।

इजराइल से मिलकर ईरान से संबंध खराब कर लिया अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने गैस पाइपलाइन के लिए कुछ नहीं किया। अभी इजराइल से मिलकर ईरान से संबंध खराब कर लिया, इससे जनता का नुकसान हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के चलते नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किया है। इस समझौता से भारत के किसान और मजदूर परेशान होंगे, कारखाने बंद हो जाएंगे। जिससे बिहार भी प्रभावित होगा, बिहार से मक्का किसान, आलू के किसान, धान के किसान, दूसरे राज्यों के कपास के किसान, सोयाबीन के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे। यह व्यापार समझौता देश को नुकसान करने वाला है, देश की आजादी और संप्रभुता को खत्म करने वाला है। इसका भी हम लगातार प्रतिरोध कर रहे हैं।
मोदी सरकार ने गलत कदम उठाए बड़े-बड़े कॉर्पोरेट के कहने पर मोदी सरकार ने गलत कदम उठाए हैं। मजदूरों के खिलाफ लेबर कोड लागू किया गया है। यह लेबर कोड करोड़ों मजदूर को बड़े-बड़े मालिकों का गुलाम बनाएगा। खेतिहर मजदूर का रोजगार खत्म करने के लिए मनरेगा कानून संसद में रद्द करके राम जी नाम का कानून लाया गया। जिस कानून से साल में 10-15 दिन का भी काम ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को नहीं मिलेगा। इन सबके खिलाफ बहुत बड़ी रैली दिल्ली में होगी, शक्ति प्रदर्शन होगा। संसद चालू होगा तो संसद के सामने भी हम सवाल करेंगे। बीजेपी का काम है लोगों को बांटो और राज करो। जो काम ब्रिटिश सरकार कर रही थी वही नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और अमित शाह की सरकार कर रही है। इसका भी हम लगातार विरोध करते रहेंगे। प्रेसवार्ता में राज्य सचिव ललन चौधरी, जिला सचिव रत्नेश झा, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह और दयानिधि चौधरी भी उपस्थित थे।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *