आज का युवा और समाज प्रकृति से लगातार दूर होता जा रहा है, जिसका असर मानसिक और शारीरिक समस्याओं के रूप में दिखाई दे रहा है। मानव शरीर और प्रकृति दोनों ही पंचतत्वों से बने हैं। इसी संतुलन को दोबारा स्थापित करने और युवाओं को जल व प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘युवा गंगा फेस्ट’ के तहत रविवार को सरसैया घाट पर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान में विशेष रूप से शामिल ‘नेचर विद बैलेंस’ एनजीओ की टीम ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने पर जोर दिया। टीम ने कहा कि पर्यावरण संतुलन की शुरुआत मां गंगा को निर्मल करने से होगी। इसके बाद वायु और ध्वनि प्रदूषण जैसे कारकों पर काम कर ही संपूर्ण वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है। जब युवा उत्साह के साथ प्रकृति की सेवा करता है, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। 200 से ज्यादा युवाओं ने हटाया कचरा इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें शामिल अधिकांश संस्थाएं युवाओं द्वारा संचालित हैं। करीब 200 से अधिक युवाओं ने जोश और ऊर्जा के साथ घाट से कचरा, प्लास्टिक और मलबा हटाकर श्रमदान किया। गंगा केवल नदी नहीं, आस्था की धरोहर गंगा सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत है। इसे स्वच्छ और अविरल बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। ये संस्थाएं रहीं शामिल कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कानपुर प्लॉगर्स, कोबुडो मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन, द सोशल वर्कर्स फाउंडेशन, आयांश वेलफेयर फाउंडेशन, कानपुर वाले क्रांतिकारी और पनाह एनजीओ की सक्रिय भागीदारी रही। हर रविवार चलेगा सफाई अभियान अभियान के समापन पर सभी युवाओं और संस्थाओं ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे न तो स्वयं गंगा में कचरा डालेंगे और न ही किसी को प्रदूषण करने देंगे। आयोजकों ने घोषणा की कि युवाओं की इस भागीदारी को स्थायी बनाने के लिए अब हर रविवार सरसैया घाट पर गंगा सफाई अभियान लगातार चलाया जाएगा।


