राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में पश्चिम चंपारण जिले में भूकंप आपदा से निपटने की तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। इसके लिए आज फुल-स्केल मॉक अभ्यास आयोजित किया गया, जो जिले के 7 विभिन्न स्थानों पर हुआ। निर्धारित समय पर सभी सिमुलेशन स्थलों पर भूकंप का सजीव परिदृश्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद जिले के विभिन्न हितधारकों ने आपसी समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया। मॉक ड्रिल में घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया मॉक ड्रिल के दौरान घायलों को तत्काल राहत शिविर में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को त्वरित रूप से जीएमसीएच पहुंचाया गया, जहां गहन चिकित्सा की व्यवस्था की गई। इस अभ्यास से आपात स्थिति में चिकित्सा तंत्र की तत्परता और रेफरल प्रणाली की प्रभावशीलता का सफल परीक्षण हुआ। राहत कार्यों की गति तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते अभ्यास अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन अनिल कुमार सिन्हा ने मॉक ड्रिल के सफल आयोजन पर सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा के समय घबराहट कम करने, जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और राहत कार्यों की गति तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिला प्रशासन भविष्य में भी ऐसे अभ्यासों की नियमितता सुनिश्चित करेगा। प्रभारी पदाधिकारी जिला आपदा प्रबंधन शाखा नगमा तबस्सुम ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य फील्ड स्तर पर विभागों के बीच समन्वय, संचार प्रणाली की मजबूती और संसाधनों की त्वरित उपलब्धता की जांच करना है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जिले की प्रतिक्रिया प्रणाली और अधिक प्रभावी बन सके। अभ्यास के सकारात्मक पहलुओं की सराहना की गई मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन अनिल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें अभ्यास के सकारात्मक पहलुओं की सराहना की गई और जिन स्तरों पर समन्वय में आंशिक कमी देखी गई, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध सुधारात्मक निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में पश्चिम चंपारण जिले में भूकंप आपदा से निपटने की तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। इसके लिए आज फुल-स्केल मॉक अभ्यास आयोजित किया गया, जो जिले के 7 विभिन्न स्थानों पर हुआ। निर्धारित समय पर सभी सिमुलेशन स्थलों पर भूकंप का सजीव परिदृश्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद जिले के विभिन्न हितधारकों ने आपसी समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया। मॉक ड्रिल में घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया मॉक ड्रिल के दौरान घायलों को तत्काल राहत शिविर में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को त्वरित रूप से जीएमसीएच पहुंचाया गया, जहां गहन चिकित्सा की व्यवस्था की गई। इस अभ्यास से आपात स्थिति में चिकित्सा तंत्र की तत्परता और रेफरल प्रणाली की प्रभावशीलता का सफल परीक्षण हुआ। राहत कार्यों की गति तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते अभ्यास अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन अनिल कुमार सिन्हा ने मॉक ड्रिल के सफल आयोजन पर सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा के समय घबराहट कम करने, जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और राहत कार्यों की गति तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिला प्रशासन भविष्य में भी ऐसे अभ्यासों की नियमितता सुनिश्चित करेगा। प्रभारी पदाधिकारी जिला आपदा प्रबंधन शाखा नगमा तबस्सुम ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य फील्ड स्तर पर विभागों के बीच समन्वय, संचार प्रणाली की मजबूती और संसाधनों की त्वरित उपलब्धता की जांच करना है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जिले की प्रतिक्रिया प्रणाली और अधिक प्रभावी बन सके। अभ्यास के सकारात्मक पहलुओं की सराहना की गई मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन अनिल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें अभ्यास के सकारात्मक पहलुओं की सराहना की गई और जिन स्तरों पर समन्वय में आंशिक कमी देखी गई, उन्हें दूर करने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध सुधारात्मक निर्देश दिए गए।


