सिंहपुरी में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन

सिंहपुरी में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन

उज्जैन. शहर में आज रात शहर की सबसे बड़ी और इको-फ्रेंडली होलिका दहन का आयोजन होगा। सिंहपुरी क्षेत्र स्थित आताल-पाताल भैरव परिसर में सजने वाली यह होलिका अपनी अनूठी परंपरा के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि यह होलिका सदियों से केवल कंडों (उपलों) से तैयार की जाती है, जिससे पर्यावरण को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचती। करीब 5,000 से 5,500 कंडों से गोलाकार संरचना में होलिका सजाई जाती है और मध्य में प्रह्लाद स्वरूप ध्वज स्थापित किया जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में पारंपरिक विधि से इसका दहन किया जाएगा।

वैदिक विधि से चारों दिशाओं में पूजन

2 मार्च को पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में होलिका पूजन संपन्न होगा। पूजन में चारों दिशाओं में चारों वेदों के ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं को विधिवत पूजा करवाते हैं। सिंहपुरी सहित आसपास के क्षेत्रों और अन्य नगरों से बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचती हैं। सुख-शांति, समृद्धि, संतान-सुख और दोष निवारण की मान्यता के साथ महिलाएं गोत्रानुसार पूजन करती हैं। धार्मिक मान्यता और शास्त्रसम्मत परंपरा का यह अद्भुत संगम उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।

लायंस ऑफ उज्जैन का विशेष आयोजन

इस वर्ष पहली बार नाइन्स क्लब इंटरनेशनलडिस्ट्रिक्ट 3233 जी-2 के अंतर्गत लायंस ऑफ उज्जैन द्वारा भी कंडों की होली का विशेष आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 2 मार्च, सोमवार को फ्रीगंज स्थित टॉवर चौक पर आयोजित होगा। शाम 6 बजे से कार्यक्रम प्रारंभ होगा और रात्रि 8:30 बजे मुख्य होलिका दहन किया जाएगा। आयोजन के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। आयोजकों ने सभी नागरिकों और सदस्यों से सपरिवार उपस्थित होकर इस पावन अवसर का हिस्सा बनने का आग्रह किया है।उज्जैन की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त संदेश देती है। सदियों पुरानी यह इको-फ्रेंडली होली आज भी समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है।

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