54 घंटे में 330 किमी दौड़कर पूरा किया संकल्प:आर्मी में चयन के बाद शिवपुरी से गोवर्धन दौड़ा जवान

54 घंटे में 330 किमी दौड़कर पूरा किया संकल्प:आर्मी में चयन के बाद शिवपुरी से गोवर्धन दौड़ा जवान

शिवपुरी जिले के कोलारस थाना क्षेत्र में आस्था, संकल्प और देशभक्ति का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। बलैहरा गांव निवासी भारतीय सेना के जवान संजीव यादव ने अपनी वर्षों पुरानी मन्नत पूरी करते हुए गांव से दौड़ लगाकर गोवर्धन गिर्राज जी की परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी की। करीब 330 किलोमीटर लंबी इस धार्मिक यात्रा को उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरा कर आस्था की मिसाल पेश की। सेना में चयन होने के बाद संकल्प पूरा किया
संजीव यादव ने सेना में भर्ती की तैयारी के दौरान यह मन्नत मांगी थी कि यदि उनका चयन भारतीय सेना में हो जाता है, तो वे अपने गांव बलैहरा से गोवर्धन गिर्राज जी तक दौड़ लगाकर परिक्रमा करेंगे। वर्ष 2020 में संजीव का चयन भारतीय सेना में हुआ, इसके बाद प्रशिक्षण पूर्ण कर उनकी पोस्टिंग जम्मू के उधमपुर में की गई। एलओसी पर निभाई देश सेवा
सेना की जिम्मेदारियों के चलते संजीव अपनी मन्नत तुरंत पूरी नहीं कर सके। वे ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक तनाव के दौरान एलओसी पर तैनात रहे और पूरी निष्ठा के साथ देश सेवा करते रहे। लंबे समय बाद छुट्टी मिलने पर उन्होंने अपनी अधूरी आस्था को पूर्ण करने का निर्णय लिया। गांव से शुरू की 330 किमी की दौड़ यात्रा
10 जनवरी को छुट्टी लेकर गांव पहुंचे संजीव यादव ने शुक्रवार को बलैहरा गांव से गोवर्धन गिर्राज जी के लिए दौड़ यात्रा शुरू की। रवाना होने से पहले ग्रामीणों और परिजनों ने माला पहनाकर जयकारों के साथ विदाई दी। इस मौके पर उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे भी मौजूद रहे। 48 घंटे का लक्ष्य, 54 घंटे में पूरी यात्रा
संजीव ने इस यात्रा को 48 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कठिन रास्तों और लगातार दौड़ के कारण यह यात्रा करीब 54 घंटे में रविवार दोपहर से पहले पूरी हो सकी। यात्रा के दौरान उन्होंने लगातार दौड़ते हुए गोवर्धन गिर्राज जी की परिक्रमा की। छालों और दर्द के बावजूद नहीं टूटा हौसला
दौड़ के दौरान संजीव के पैरों में छाले और फोले पड़ गए, जिससे गति कुछ धीमी हुई, लेकिन उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। पूरे सफर में उनके मित्र वाहन से साथ चलते रहे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। आस्था और अनुशासन की मिसाल
संजीव यादव की यह दौड़ यात्रा न सिर्फ उनकी गहरी आस्था, बल्कि एक सैनिक के अनुशासन, संकल्प और मानसिक दृढ़ता को भी दर्शाती है। गांव और क्षेत्र में उनकी इस उपलब्धि की जमकर सराहना हो रही है।

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