अंधेरे से रोशनी तक:दिल्ली में दाखिला रोका गया, मजाक बना, नॉवेल से सीखी अंग्रेजी; अब कॉलेज में पढ़ा रहे

अंधेरे से रोशनी तक:दिल्ली में दाखिला रोका गया, मजाक बना, नॉवेल से सीखी अंग्रेजी; अब कॉलेज में पढ़ा रहे

बचपन में अक्सर सुनता था-यह देख नहीं सकता, इसका क्या होगा? छह साल की उम्र में, जब माता-पिता के सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी, मैं हॉस्टल पहुंच गया। मासूम उम्र में दुनिया को आंखों से नहीं, मन की आंखों से महसूस किया। बारह साल बाद दिल्ली के हंसराज कॉलेज में दाखिले के लिए संघर्ष किया और हक की आवाज उठाई। हिंदी मीडियम होने पर मजाक उड़ाया गया, तो उपन्यास सुनकर अंग्रेजी सीखी। इसके बाद जेएनयू से पोस्ट ग्रेजुएशन और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। डेढ़ साल के कानूनी संघर्ष के बाद सरकारी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बना। यह बातें दृष्टिबाधित उत्तम वर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बताई।
-पढ़िए उत्तम वर्मा की पूरी कहानी, उन्हीं की जुबानी… बलौदाबाजार के दृष्टिबाधित उत्तम वर्मा के संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी, उन्हीं की जुबानी बलौदाबाजार जिले के छोटे से गांव दतान में किसान सुखी राम वर्मा और भगवंतीन वर्मा के घर साल 1996 में उत्तम वर्मा का जन्म हुआ। उत्तम ने भास्कर को बताया कि पांच भाई व तीन बहनें के बीच जन्मा मेरा हुआ। मैं जन्म से ही देख नहीं सकता था। परिवार साधारण था, संसाधन सीमित थे और गांव में दिव्यांग बच्चों के लिए कोई स्कूल भी नहीं था। परिवार ने हार नहीं मानी और रायपुर के सरकारी दिव्यांग विद्यालय में दाखिला कराया। आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जरूरतें पूरी करने पिता ने उधार लेकर पढ़ाई कराई। पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक मैंने हॉस्टल में रहकर ही शिक्षा प्राप्त की।
एडमिशन के लिए करना पड़ा संघर्ष
उत्तम ने बताया कि 2014 में उत्तम ने 12वीं की परीक्षा 85% अंकों के साथ उत्तीर्ण की। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में इतिहास ऑनर्स में दाखिले का सपना देखा। प्रवेश 12वीं के बेस्ट फोर के अंकों के आधार पर होता था, पर म्यूजिक विषय को गिना नहीं जा रहा था। इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेल में शिकायत कराई। संघर्ष रंग लाया और कॉलेज में प्रवेश मिला। स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर से पढ़ते थे अंग्रेजी
हिंदी माध्यम से पढ़े उत्तम के लिए अंग्रेजी सबसे बड़ी चुनौती थी। मैंने स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से किताबें पढ़नी शुरू कीं। चेतन भगत के उपन्यास फाइव पॉइंट समवन, हाफ गर्लफ्रेंड और टू स्टेट्स पढ़ते-पढ़ते अंग्रेजी से दोस्ती हो गई। दोस्तों से बातचीत अंग्रेजी में करने लगा और धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ता गया। वैकेंसी में कोटा नहीं मिला ताे काेर्ट पहुंचे
उत्तम के मुताबिक 2017 में जेएनयू से प्राचीन इतिहास में एमए किया। इसके बाद 2019 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से म्यूजिक एंड थिएटर स्टडी (नाट्यशास्त्र) में पीएचडी पूरी की। इसी दौरान नौकरी के लिए वैकेंसी निकली, लेकिन दिव्यांगों के लिए आरक्षण नहीं था। मैंने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी लड़ाई के बाद 2022 में उन्हें नियुक्ति मिली। अभी डीके कॉलेज बलौदाबाजार में इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वे डीके कॉलेज और मिनीमाता कॉलेज के विद्यार्थियों को ऑनलाइन अंग्रेजी, लाइफ लर्निंग और कम्युनिकेशन स्किल्स सिखा रहा हैं। मेरा मानना है कि, परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर अंधेरा उजाले में बदला जा सकता है।

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