मेगा पार्क मुआवजे में 55 लाख का फर्जीवाड़ा:निगरानी ब्यूरो ने 10 अधिकारी-कर्मी और एक गैर लोक सेवक पर FIR की

मेगा पार्क मुआवजे में 55 लाख का फर्जीवाड़ा:निगरानी ब्यूरो ने 10 अधिकारी-कर्मी और एक गैर लोक सेवक पर FIR की

पटना जिले के बिहटा स्थित सिकंदरपुर में मेगा औद्योगिक पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजा भुगतान में 55 लाख रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में 10 अधिकारियों और एक गैर-लोक सेवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को 11 किसानों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। विभाग की ओर से प्राप्त शिकायत पत्रों की निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विस्तृत जांच की, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान, एक किसान की शिकायत की पड़ताल में पता चला कि भूमि अधिग्रहण वर्ष 2011-12 के तहत किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। दस्तावेजों में फर्जी भुगतान दर्शाया गया, जबकि वास्तविक लाभार्थियों तक राशि नहीं पहुंची। जांच के बाद और भी नाम आ सकते हैं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में इस फर्जीवाड़े में कुल 10 पदाधिकारी-कर्मी और एक गैर-लोक सेवक की संलिप्तता पाई गई है। इनमें पटना के तत्कालीन भू-अर्जन अधिकारी, तत्कालीन अपर जिला भू-अर्जन अधिकारी, तत्कालीन कानूनगो, सहायक, प्रधान सहायक, अमीन, बिहटा अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी शामिल हैं। ब्यूरो ने बताया कि अन्य शिकायतकर्ताओं की शिकायतों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। इस बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद जांच के दायरे में और भी नाम सामने आ सकते हैं। पटना जिले के बिहटा स्थित सिकंदरपुर में मेगा औद्योगिक पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजा भुगतान में 55 लाख रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में 10 अधिकारियों और एक गैर-लोक सेवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को 11 किसानों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। विभाग की ओर से प्राप्त शिकायत पत्रों की निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विस्तृत जांच की, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान, एक किसान की शिकायत की पड़ताल में पता चला कि भूमि अधिग्रहण वर्ष 2011-12 के तहत किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। दस्तावेजों में फर्जी भुगतान दर्शाया गया, जबकि वास्तविक लाभार्थियों तक राशि नहीं पहुंची। जांच के बाद और भी नाम आ सकते हैं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में इस फर्जीवाड़े में कुल 10 पदाधिकारी-कर्मी और एक गैर-लोक सेवक की संलिप्तता पाई गई है। इनमें पटना के तत्कालीन भू-अर्जन अधिकारी, तत्कालीन अपर जिला भू-अर्जन अधिकारी, तत्कालीन कानूनगो, सहायक, प्रधान सहायक, अमीन, बिहटा अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी शामिल हैं। ब्यूरो ने बताया कि अन्य शिकायतकर्ताओं की शिकायतों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। इस बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद जांच के दायरे में और भी नाम सामने आ सकते हैं।  

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