मोबाइल बैंकिंग चालू कराने के नाम पर ठगी:तकनीकी दिक्कत आने पर मांगी मदद, अकाउंट और सिम बेचा, उसी खाते में आए फ्रॉड के पैसे

दुर्ग पुलिस ने मोबाइल बैंकिंग सेवा चालू कराने में मदद के नाम पर बैंक खाता और सिम कार्ड का दुरुपयोग कर साइबर ठगी की साजिश रचने वाले 2 आरोपियों को किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। मामला थाना सुपेला क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, हैप्पी सिंह (34), निवासी खुर्सीपार ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनका खाता छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भिलाई-03 में ऑनलाइन खोला गया था। मोबाइल बैंकिंग सेवा शुरू कराने में तकनीकी समस्या आने पर उन्होंने अपने परिचित आशीष कुमार से संपर्क किया। 20 जनवरी 2026 को हैप्पी ने आकाश गंगा क्षेत्र, सुपेला में आरोपी को अपना सिम कार्ड और बैंक खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई। इसके बाद आरोपी ने उनसे संपर्क बंद कर दिया। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके बैंक खाते और सिम कार्ड को साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है। साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहा था बैंक खाता शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर टीम गठित की गई। जांच के दौरान एक अन्य आरोपी की संलिप्तता सामने आई, जिसे भी प्रकरण में शामिल किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई कि बैंक खाता और सिम कार्ड का उपयोग साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराने के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी आशीष कुमार, निवासी शिवाजी नगर, खुर्सीपार, भिलाई सुरजा कुमार सोनी (20), निवासी पावर हाउस कैंप-02, छावनी, जिला दुर्ग साइबर ठगी का बढ़ता ट्रेंड पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में मोबाइल बैंकिंग, केवाईसी अपडेट और तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ठग लोगों से सिम कार्ड, ओटीपी, बैंक डिटेल्स या खाते के उपयोग की अनुमति लेकर उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल कर रहे हैं। एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना सिम कार्ड, ओटीपी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। मोबाइल बैंकिंग या खाते से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में सीधे संबंधित बैंक शाखा या अधिकृत कस्टमर केयर से ही संपर्क करें।

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