मेरठ के परीक्षितगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। टीबी विभाग के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) पर आरोप है कि उसने अपने परिजनों और रिश्तेदारों को क्षय रोगी दिखाकर सरकारी सहायता राशि हड़पी। विभागीय जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। दिल्ली निवासी शिकायतकर्ता शाकिब ने बताया कि किठौर कस्बा निवासी जुनैद जब्बार पिछले लगभग दस वर्षों से परीक्षितगढ़ सीएचसी में एसटीएस के पद पर कार्यरत हैं। राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत, वास्तविक टीबी मरीजों को निःशुल्क दवाओं के साथ छह महीने तक प्रति माह 500 रुपये की पोषण सहायता प्रदान की जाती है। आरोप है कि इसी योजना का दुरुपयोग करके फर्जी मरीजों के नाम पर धनराशि निकाली गई। इस मामले का खुलासा एक पारिवारिक विवाद के बाद हुआ। आरोपी के रिश्तेदार शकीब अहमद ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अशोक कटारिया के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि 20 जनवरी 2024 को जिन खातों में सहायता राशि भेजी गई थी, वही रकम उसी दिन आरोपी के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। लगभग 40 संदिग्ध बैंक खातों की जांच अभी लंबित है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से आरोपी पिछले छह दिनों से ड्यूटी से अनुपस्थित है। शिकायतकर्ता ने धमकियां मिलने और समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए डीआईजी और एसएसपी से सुरक्षा की मांग की है। सीओ सदर देहात शिप प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि सीएचसी प्रभारी की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है और परीक्षितगढ़ पुलिस को जांच में तेजी लाकर आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं।


