पूर्व विधायक बोले- शिक्षा को जातिगत राजनीति से न जोड़ें:रायबरेली में धीरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा- आरक्षण लागू हुआ तो कई छात्रों ने जान दी थी

रायबरेली के सरेनी से पूर्व भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े मामले पर कहा कि शिक्षा को जातिगत राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हमें जाति व्यवस्था को तोड़ना है और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है, तो शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के आधार पर कोई कानून लागू नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र डॉक्टर, इंजीनियर या अन्य क्षेत्रों में जाने के उद्देश्य से आते हैं, और उनमें कोई जातिगत पहचान नहीं होती। अपने विश्वविद्यालयी राजनीति के अनुभव का जिक्र करते हुए धीरेंद्र सिंह ने बताया कि जब आरक्षण लागू हुआ था, तब सैकड़ों छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी या खुद को आग के हवाले कर दिया था। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि ऐसे कदम छात्रों के भविष्य और मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। पूर्व विधायक ने सभी से अनुरोध किया कि किसी जाति के आधार पर किसी समाज को दोषी ठहराना या किसी को आगे बढ़ाने के लिए गलत भाषा का प्रयोग करना अनुचित है। उन्होंने समाज में मिलजुल कर रहने और एकता-भाईचारा बनाए रखने का आह्वान किया, और जाति के आधार पर समाज को बांटने का काम न करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों और नौजवानों के बीच जातिवाद का बीज बोया जाएगा, तो यह उनकी मानसिकता का हिस्सा बन जाएगा और भविष्य में भी बना रहेगा। सिंह ने कहा कि हमें सवर्ण, पिछड़े, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के बीच भेदभाव करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जो कमजोर हैं उन्हें आगे बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। धीरेंद्र सिंह ने अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी द्वारा लाए गए इस “विघटनकारी कानून” पर विचार किया जाए और इसे तर्कसंगत तरीके से लागू किया जाए, ताकि समाज में किसी का नुकसान न हो और सभी मिलकर आगे बढ़ सकें।

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