दशकों से वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे थे कि तूफानों के दौरान पेड़ों से रोशनी निकलती है, लेकिन अब पहली बार इसे कुदरत के बीच रिकॉर्ड किया गया है। पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने पाया कि गरजते बादलों के नीचे पेड़ किसी जुगनू की तरह पराबैंगनी (यूवी) रोशनी में चमकते हैं। इसे प्रयोगशाला में तो देखा गया था, लेकिन जंगलों में इसे पकड़ना नामुमकिन जैसा था। टीम ने एक कार की छत पर पेरिस्कोप, लेज़र रेंजफाइंडर और एक यूवी कैमरा लगाकर तूफानी बादलों के बीच इस रहस्यमयी चमक को रिकॉर्ड किया। यह बिजली की धाराएं पेड़ के भोजन बनाने की क्षमता को कुछ हद तक प्रभावित करती है।
‘हज़ारों जुगनुओं’ जैसा नज़ारा
नॉर्थ कैरोलिना के पेमब्रोक में एक तूफान के दौरान वैज्ञानिकों ने सिर्फ 90 मिनट में पौधों की पत्तियों के नुकीले सिरों पर 41 ‘कोरोना डिस्चार्ज’ की घटनाएं दर्ज कीं। यह रोशनी लगभग 3 सेकंड तक टिकती थी और हवा में हिलती हुई टहनियों के साथ एक पत्ती से दूसरी पत्ती पर ‘उछलती’ हुई प्रतीत हुई।
क्या है ‘कोरोना डिस्चार्ज’?
जब आसमान में बिजली कड़कती है और तूफान आता है, तो बादलों और ज़मीन के बीच एक शक्तिशाली विद्युत क्षेत्र बन जाता है। ज़मीन से विपरीत इलेक्ट्रिक चार्ज पेड़ों के सबसे ऊंचे हिस्सों यानी पत्तियों के शीर्ष तक पहुंचता है। यहाँ से एक बहुत धुंधली नीली रोशनी निकलती है, जिसे ‘कोरोना डिस्चार्ज’ कहा जाता है।


